शिनाख्त न होने से पुलिस कातिल तक नहीं पहुंच पाई। लड़कियों की फोटो, हुलिया और कपड़ों की जानकारी पुलिस की फाइलों में दफन हो गईं। ऐसे ही एक मामले के विवेचक ने बताया कि ऐसी लड़कियों अपने दोस्तों, प्रेमियों और घर वालों के धोखे का शिकार होती हैं। लड़कियों के मां-बाप उनसे नाराज होते हैं, इस कारण लड़कियों को खोजने का प्रयास नहीं करते। इसी कारण शिनाख्त नहीं होती।
अक्सर देखा गया है कि कातिल लड़कियों को घर से कहीं दूर ले जाकर सुनसान इलाकों में मार देते हैं। इसी कारण अक्सर उन लड़कियों की शिनाख्त नहीं हो पातीं जिन्हें उनके मां-बाप या घर वाले नहीं ढूंढते। कुछ मामले अपहरण से भी संबंधित होते हैं।
2017-सोरांव, मेजा, कीडगंज में अज्ञात तीन युवतियों की लाशें मिलीं।
2018-मांडा, दारागंज, उतरांव और खीरी में चार युवतियों के शव बरामद।
2019-शंकरगढ़, उतरांव और लालापुर में तीन युवतियों को मारकर फेंका गया।
2020-दारागंज, करछना और फूलपुर में चार महिलाओं और लड़कियों के शव मिले।
2021-हंडिया में युवती की लाश पुलिस को मिली।
2022-नवाबगंज और बारा इलाकों में दो अज्ञात महिलाओं के शव बरामद किए गए।
अज्ञात लाशों के मिलने पर विवेचना की जाती है। अगर शिनाख्त नहीं हुई तो डीएनए सैंपल रख लिए जाते हैं ताकि भविष्य में उनके पहचान के रास्ते खुले रहें। - शैलेश पांडेय, एसएसपी प्रयागराज