ओएमआर में गलती करने वालों को राहत के आसार
0 कई अभ्यर्थी मानवीय भूल के कारण नौकरी पाने से रह जाते हैं वंचित
0 यूपीपीएससी के सचिव तक पहुंची समस्या, अभ्यर्थियों से मांगे आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
सवाल तो तकरीबन सभी हल कर लिए लेकिन ओएमआर भरने में छोटी सी गलती कर दी और नौकरी गंवा बैठे। आरओ-एआरओ परीक्षा-2014 में ऐसे कई मामले सामने आने के बाद प्रतियोगियों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से मांग की है कि इस तरह की शिकायतों का संज्ञान लिया जाए और प्रतियोगियों को गलती में सुधार का मौका दिया जाए। प्रतियोगियों की शिकायत है कि पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 में भी कुछ अभ्यर्थियों से इस तरह की भूल हुई है। इस पर आयोग के सचिव ने प्रतियोगियों से आवेदन मांगें हैं ताकि उनकी समस्या के निराकरण पर विचार किया जा सके।
दरअसल, आरओ-एआरओ परीक्षा-2014 में कई अभ्यर्थियों को शून्य अंक मिल गए थे। अभ्यर्थियों का आरोप था कि परीक्षा परिणाम तैयार करने में लापरवाही की गई है। अभ्यर्थियों की शिकायत पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सचिव जगदीश ने परीक्षा नियंत्रक से इसकी जांच कराई। जांच-पड़ताल में पता चला कि बहुत से अभ्यर्थी ओएमआर शीट पर सिरीज नंबर भरना भूल गए हैं और इसी वजह से उनकी कॉपियों का मूल्यांकन नहीं हुआ। ऐसे अभ्यर्थियों को शून्य अंक दिया गया। इनमें से कुछ प्रतिभागी ऐसे थे, जिनका दावा था कि उनकी परीक्षा बहुत अच्छी हुई है और अगर उनकी कॉपियों का मूल्यांकन होता तो आरओ-एआरओ में उनका चयन हो जाता। ऐसे अभ्यर्थियों की तरफ से प्रतियोगी छात्र संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने आयोग के सचिव से मुलाकात की और उनसे मांग की कि इस तरह की गड़बड़ियों की मैनुअल तरीके से जांच करा ली जाए और अगर प्रतियोगी रोल नंबर, सिरीज नंबर भरना भूल गया है या किसी अन्य मानवीय गलती के कारण उसका परिणाम प्रभावित हो रहा है तो प्रतियोगी को मौका दिया जाए।
अवनीश ने सचिव को बताया कि आयोग में पहले मैनुअल जांच कराकर त्रुटि दूर किए जाने की व्यवस्था लागू थी लेकिन पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में इसे समाप्त कर दिया गया। मीडिया प्रभारी ने इस व्यवस्था को दोबारा लागू करने की मांग की। सचिव को यह भी बताया कि वैसे तो इस तरह की भूल करने वाले प्रतियोगियों की संख्या काफी अधिक होती है लेकिन इनमें से 10-15 अभ्यर्थी ऐसे होते हैं, जो गंभीरता से तैयारी करते हैं और मानवीय भूल के कारण उनकी कॉपियों को मूल्यांकन नहीं हो पाता है। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 में भी ऐसी गलतियां हुई हैं। सचिव ने अवनीश से कहा है कि ऐसे प्रतियोगी अगर लिखित रूप से आवेदन देते हैं तो उनके आवेदन पर विचार किया जाएगा। अगर कोई रास्ता निकलता है तो आयोग इस समस्या का निराकरण जरूर करेगा।