मेरठ के ध्यानार्थ
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शादी के लिए अपह्त लड़की
को कोर्ट में पेश करने का आदेश
0 अपहरण के आरोपियों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। जबरदस्ती शादी कराने के लिए लड़की का अपहरण करने के आरोपियों को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है, मगर कोर्ट ने अपह्त लड़की को सीजेएम मेरठ की अदालत में 20 दिन के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है। यदि लड़की नाबालिग साबित होती है या फिर परिजनों द्वारा लगाए आरोप का समर्थन करती है तो पुलिस को छूट होगी कि वह आरोपियों को गिरफ्तार कर सके।
मेरठ के गंगानगर थाने में दर्ज अपहरण के एक मामले में सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की पीठ ने दिया है। याचीगण के खिलाफ गंगानगर थाने में 31 मई 2019 को एक नाबालिग लड़की को अगवा कर लेने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस पर गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचीगण के अधिवक्ता की ओर से मांग की गई कि अपह्त लड़की को सीजेएम की अदालत के समक्ष पेश किया जाए। इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि अपह्त लड़की 20 दिन के भीतर सीजेएम के समक्ष पेश की जाती है या वह स्वयं हाजिर होकर मेडिकल टेस्ट की अर्जी देती है तो सीएमओ से उसका मेडिकल कराया जाए। तब तक याचीगण को गिरफ्तार न किया जाए। लड़की का पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान कराया जाए। यदि वह नाबालिग है या याचीगण पर लगाए गए आरोपों का समर्थन करती है तो पुलिस याचीगण को गिरफ्तार कर सकती है। कोर्ट ने सीजेएम को निर्देश दिया कि वह तय करें कि लड़की को किसकी अभिरक्षा में देना है।