कानपुर के ध्यानार्थ
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झूठ बोलकर जमानत पाने की कोशिश पड़ी महंगी
0 हाईकोर्ट ने जमानत खारिज की, चलेगा अवमानना का केस
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। फर्जी दस्तावेज पर अदालत को गुमराह कर जमानत पाने की कोशिश कन्नौज के तिर्वा निवासी शिवम को महंगा पड़ गया। हाईकोर्ट ने न सिर्फ उसकी जमानत अर्जी खारिज की, बल्कि अदालत की अवमानना का नोटिस भी जारी कर दिया। कोर्ट ने झूठे दस्तावेज के सहारे अपहरण के आरोप में जमानत पर रिहाई की कोशिश करने को अदालत की अवमानना करार दिया है और कहा है कि आवेदक तथा शपथकर्ता दोनों पर अवमानना की कार्यवाही की जाएगी।
कोर्ट ने याची के अधिवक्ता और शपथकर्ता से पांच जुलाई तक व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है, साथ ही सरकारी अधिवक्ता को याची द्वारा कोर्ट को गुमराह कर जमानत पर रिहाई की कोशिश का जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने तिर्वा कन्नौज के शिवम की जमानत अर्जी पर दिया है।
मामले के अनुसार महेश चंद्र ने दो फरवरी 2019 को तिर्वा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 29 जनवरी 19 को उसकी बेटी सलोनी एसपी महिला महाविद्यालय तिर्वा में पढ़ने गई थी, तभी से लापता है। याची शिवम और विष्णु पर बेटी के अपहरण का आरोप लगाया। पुलिस ने रिपोर्ट दी कि लड़की की बरामदगी नहीं हो सकी है। हाईकोर्ट में आवेदक की तरफ से दाखिल जमानत अर्जी के समर्थन में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया गया कि सलोनी ने घर से भागकर अशोक कुमार से शादी कर ली है। दोनों साथ हैं। हाईकोर्ट से संरक्षण मिला हुआ है। उन्हें झूठा फंसाया गया है। अपर शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याची कोर्ट को झूठी जानकारी देकर गुमराह कर जमानत पाना चाहता है। याची जिस सलोनी की बात कर रहा है, वह नौ जुलाई 1997 में जन्मी है और कानपुर देहात के निवासी उदय नारायण की पुत्री है। जिस सलोनी के अपहरण का आरोप है, वह 25 अक्तूबर 2001 में जन्मी है और तिर्वा कन्नौज के महेश चंद्र गुप्ता की बेटी है। दोनों में काफी अंतर है। इस जानकारी के बाद कोर्ट ने अदालत की अवमानना करार देते हुए नोटिस जारी किया है।