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सांस्कृतिक परिपाटी का जीवंत प्रमाण है कुंभ
0 राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने की कामना, कुंभ से जन-जन तक पहुंचे विश्व मंगल और शांति का संदेश
0 परमार्थ निकेतन, हरिजन सेवा संघ, ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस की ओर से ‘गांधीवाद पुनरुत्थान शिखर सम्मेलन’
0 बोले राष्ट्रपति, स्वच्छता से जुड़ें, स्वच्छाग्राही बनकर गांधी जी के स्वच्छता मिशन को अनवरत आगे बढ़ाएं
अमर उजाला ब्यूरो
कुंभ नगर (प्रयागराज)। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि कुंभ, हमारी हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक परिपाटी का जीवंत प्रमाण है। यह दुनिया भर के लिए शोध का विषय बना हुआ है। जाति, मत, पंथ, संप्रदाय, वर्ग, आयु के भेदभाव से परे लाखों लोग समान रूप से कुंभ पर्व के साक्षी बनते हैं। सबकी समान स्वीकार्यता का यही दर्शन भारत की विशेषता है। कुंभ सभी को आत्मसात करने की ‘वसुधैव कुुटुंबकम’ के महान आदर्श का परिचायक भी है। यही भावना देश को एक सूत्र में बांधे रखती है। शांति, बंधुत्व का यही उदाहरण विश्व को भारत का अनमोल उपहार है।
परमार्थ निकेतन, हरिजन सेवा संघ, ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के तीन दिनी ‘गांधीवाद पुनरुत्थान शिखर सम्मेलन’ के उद्घाटन अवसर पर बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा, यहां मकर संक्रांति पर तकरीबन दो करोड़ से ज्यादा लोगों ने स्नान किया। पर्वों को छोड़कर सामान्य दिनों में भी कम से कम एक लाख श्रद्धालु रोजाना डुबकी लगाते हैं। ऐसे में चालीस दिनों में चालीस लाख तो ऐसे ही हो गए। यह आस्था का चुंबक ही है, जो लोगों को खींच लाता है। लोग आते और डुबकी लगाकर चले जाते हैं। इसीलिए यह अनूठा आयोजन दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कामना है कि कुंभ से विश्व मंगल और शांति का संदेश जन-जन तक पहुंचे।