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मेयर में पार्टी लाइन तो वाडोऱं् में निभाया याराना

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मेयर में पार्टी लाइन तो वार्डों में निभाया याराना
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0 अभिलाषा के खाते में आए 1.31 लाख मत तो सभी भाजपा पार्षदों को मिले 72 हजार
0 साइकिल और हाथी के मत में नहीं आया बिखराव, कांग्रेस के भी आधे वोटर खिसके
राहुल शर्मा
इलाहाबाद।
निकाय चुनाव की मतगणना के बाद तमाम दिलचस्प आंकड़े भी सामने आए हैं। इस चुनाव में मेयर पद के लिए भाजपा और कांग्रेस के वोटरों ने भले ही पार्टी लाइन में अपना मत दिया हो, लेकिन शहर के वार्डों में हजारों मतदाताओं ने याराना निभाया। एलनगंज हो या फिर आजाद स्क्वायर, बहादुरगंज हो या फिर तेलियरगंज, सभी वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी को वोट तो खूब मिले, लेकिन इसकी तुलना में वार्डों में दोनों पार्टियों के पार्षद प्रत्याशियों को कम मत मिले। भाजपा की ही बात करें तो मेयर प्रत्याशी अभिलाषा गुप्ता नंदी को 131297 मत मिले, जबकि पार्टी के पार्षद प्रत्याशियों के खाते में महज 72 हजार वोट ही हाथ आए।
ऐसे में समझा जा सकता है कि अगर भाजपा पार्षद प्रत्याशियों के खाते में भी 1.31 लाख मत आए होते तो नगर निगम सदन में आधे से ज्यादा सीटों पर इस बार भगवा ही दिखता। भाजपा जैसी ही स्थिति कांग्रेस की भी रही। कांग्रेस के मेयर पद के प्रत्याशी विजय मिश्र को 64579 मत मिले, जबकि पार्टी को शहर के तमाम वार्डों से मात्र 37 हजार ही मत प्राप्त हुए। दोनों ही राष्ट्रीय दलों के मेयर प्रत्याशियों को मिले मत और पार्षद प्रत्याशियों को मिले मतों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। मेयर के लिए अभिलाषा को अपने ही पार्टी के सभी पार्षद प्रत्याशियों के मुकाबले 58 हजार ज्यादा मत मिले। इसी तरह कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी विजय मिश्र को भी पार्टी के पार्षद प्रत्याशियों के मुकाबले तकरीबन 27 हजार ज्यादा मत मिले। भाजपा नेता नरेंद्र देव पांडेय का कहना है कि मेयर प्रत्याशी चयन करने में अधिकांश मतदाता पार्टी को ही वरीयता देते हैं, जबकि पार्षद प्रत्याशी के चयन में बहुत से वोटरों की प्राथमिकता पार्टी नहीं रहती। अधिकांश लोग अपने निकट संबंधियों, दोस्तों या फिर वार्ड में सक्रिय रहने वाले प्रत्याशियों को ही मत दे देते हैं। फिर भी भाजपा के सभी पार्षद प्रत्याशियों को दूसरे दलों के प्रत्याशियों के मुकाबले ज्यादा मत मिले। भाजपा के सिंबल पर मेयर चुनी गई अभिलाषा गुप्ता नंदी ने बताया कि शहर के 80 में से 74 वार्डों में उन्हें इस बार बढ़त मिली। सरायगढ़ी, मिनहाजपुर, अटाला, करेली आदि वार्ड में ही आशा के अनुरूप मत नहीं मिले।
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बसपा और सपा के मेयर, पार्षद मतों में नहीं आया बिखराव
कांग्रेस और भाजपा के मुकाबले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के मेयर एवं पार्षद पद के प्रत्याशियों के मतों में ज्यादा बिखराव नहीं आया। सपा से मेयर प्रत्याशी विनोद चंद्र दुबे को इस बार 67913 मत मिले। पार्टी के सभी पार्षदों को मिले मत पर गौर करें तो इसकी संख्या 66 हजार से कुछ ज्यादा रही। वहीं बसपा से मेयर प्रत्याशी रमेश चंद्र केसरवानी को 24969 मत मिले, जबकि पार्टी के सभी पार्षद प्रत्याशियों के हाथ भी तकरीबन इतने ही मत आए। ऐसे में कहा जा सकता है कि सपा और बसपा के मेयर प्रत्याशी को मत देने वाले अधिकांश लोगों ने पार्षद प्रत्याशी के रूप में ही पार्टी नहीं बदली।
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