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महापौरों का कार्यकाल बढ़ाने की इजाजत नहीं

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महापौरों को पद पर बने रहने की इजाजत नहीं
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0 प्रशासकों की नियुक्ति के खिलाफ 16 अगस्त को होगी सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्र्ट ने स्थानीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद महापौर और अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने से इंकार कर दिया है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर 16 अगस्त को सुनवाई होगी। याचिका में मांग की गई थी कि अगला चुनाव होने तक कार्यरत महापौरों और अध्यक्षों का उनके पद पर बने रहने दिया जाए। कोर्ट ने ऐसा आदेश देने से इंकार करते हुए कहा कि पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद निकाय कार्यकारिणी को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
झूंसी नगर पंचायत के अध्यक्ष रामलखन यादव ने इस मामले में याचिका दाखिल की है। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 83 (2) और 243 (यू) के प्रावधान एक जैसे हैं। संसद का कार्यकाल खत्म होने के बाद नई सरकार के चुने जाने तक पुरानी सरकार कार्यवाहक के रूप में काम करती है। इसलिए स्थानीय निकायों की कार्यकारिणी को भी अगला चुनाव होने तक कार्यवाहक के रूप में काम करने की अनुमति दी जाए। प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई 2017 को शासनादेश जारी कर निकायों में अधिशासी अधिकारी और प्रशासक की नियुक्ति कर रही है। ऐसा करना संविधान की मंशा के विपरीत है।
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अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने इसका प्रतिवाद करते हुए कहा कि अनुच्छेद 243 (यू) के अनुसार स्थानीय निकाय कार्यकारिणी का पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मेयर और अध्यक्षों को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संविधान के अनुरूप एवं वैधानिक है। अपर महाधिवक्ता ने कहा कि सितंबर अक्तूबर का महीना त्यौहारों का होने के कारण चुनाव नवंबर माह में कराए जाने की योजना है। कोर्ट का कहना था कि सरकार को 30 नवंबर तक चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया जा सकता है, मगर इस दौरान महापौर और पंचायत अध्यक्ष का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जा सकता है।
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