पहचान पत्र देने से उन मतदाताओं को छूट रहेगी जो 2003 के एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट में शामिल थे और अब भी उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं। एसआरआई से यह भी पता चल जाएगा कि ऐसे कितने मतदाता हैं जो पिछले एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में शामिल थे और अब जीवित नहीं हैं लेकिन उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं।
वहीं, बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की भी है जिनके नाम दो से तीन विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज हैं। एसआईआर के दौरान ऐसे बोगस वोटरों के नाम भी सामने आ जाएंगे। ऐसे में फर्जी वोटिंग पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी। साथ ही मतदान प्रतिशत में भी सुधार होगा। दरअसर, बड़ी संख्या ऐसे वोटरों की है जो अब जीवित नहीं हैं लेकिन उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं और मतदाता प्रतिशत प्रभावित होने के पीछे यह बड़ी वजह है।
देने होंगे स्वप्रमाणित दस्तावेज
2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट में जो भी नए नाम शामिल किए गए हैं, उन्हें अपनी पहचान के लिए स्वप्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। वोटर लिस्ट में ऐसे मतदाताओं की संख्या 60 से 70 फीसदी हो सकती है। दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर उनके नाम काटे जा सकते हैं। केंद्रीय, राज्य, सार्वजनिक उपक्रम के नियमित कर्मचारी/पेंशनभागी को निर्गत कोई पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) मान्य होगा। जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालयों द्वारा निर्गत शैक्षणिक प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां उपलब्ध हो), राज्य/स्थानीय प्राधिकारी द्वारा निर्गत परिवार रजिस्टर की नकल/प्रति को भी स्वप्रमाणित दस्तावेज के रूप में माना जाएगा।