फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीस दिन बाद भी जनऔषधि केंद्र तक नहीं पहुंची दवाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
मरीजों को दवा नहीं दुआओं का सहारा
विज्ञापन

एसआरएन में जनऔषधि केंद्र का हाल
गंभीर रोगों की दवाएं अभी तक नहीं हो पाईं उपलब्ध
बुखार, जुखाम, पेटदर्द की दवाइयों के सहारे चल रहा केंद्र

इलाहाबाद।
केस एक- मेजा के डोहरिया गांव निवासी पारसनाथ पांडेय की पत्नी हड्डी रोग से पीड़ित हैं। उनको हर माह डोनिजॉल नाम का इंजेक्शन लगता है, जिसकी मार्केट में कीमत करीब छह हजार है। जनऔषधि केंद्र में इसके कम कीमत पर इंजेक्शन उपलब्ध हो सकने की सूचना पर वह एसआरएन पहुंचे लेकिन यह इंजेक्शन अभी यहां आया ही नहीं। मजबूरन उनको मायूस होकर लौटना पड़ा।
केस दो- नैनी निवासी अजय पाल जनऔषधि केंद्र के करीब आधा दर्जन चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन उनकी जरूरत की दवा नहीं मिली। एक निजी संस्थान में नौकरी करने वाले अजय की मासिक आय बेहद कम है, जबकि उनकी शुगर पीड़ित मां की नियमित दवाई पर करीब चार हजार से अधिक का खर्च है। उनको यहां दवाई कम रेट पर मिलने की बात मालूम चली। उसके बाद कई बार वह यहां का चक्कर काट चुके लेकिन डायबिटीज की दवा उनको नहीं मिली। हर बार उनको जल्दी मिलने की बात कहकर लौटा दिया जाता है।
विज्ञापन

केस तीन- फूलपुर के उग्रसेनपुर निवासी कामता मिश्र की बेटी का आपरेशन एसआरएन में ही होना है। उनसे सर्जिकल आइटम मंगवाए गए, जो जनऔषधि केंद्र में अभी तक आए ही नहीं। उनको बाहर की दुकान से इसको खरीदने में डेढ़ हजार से अधिक खर्चने पड़े।

जरूरतमंद एवं आम सामान्य वर्ग को उचित कीमत पर दवा मुहैया कराने को शुरू हुई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना एसआरएन अस्पताल में दम तोड़ती नजर आ रही है। 15 जुलाई को यहां खुले जनऔषधि केंद्र के बीस दिन से अधिक बीत चुके, लेकिन यहां अभी तक पर्याप्त दवाइयां आई ही नहीं। यह जनऔषधि केंद्र अभी भी पेटदर्द, बुखार, जुखाम, दर्द के अलावा कुछ एक महत्वपूर्ण बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों के सहारे चल रहा है, जबकि यह केंद्र इस बात को लेकर चर्चा में आए थे कि कैंसर, हार्ट, न्यूरोलॉजी, डायबिटीज, किडनी, यूनिर, बर्न जैसी गंभीर बीमारियों की सस्ती दवाएं यहां उपलब्ध होंगी। वहीं, केंद्र संचालक का कहना है दवाइयों की मांग लगातार भेजी जा रही लेकिन आपूर्ति नहीं की जा रही। संचालकों का कहना है जनऔषधि केंद्र में जो दवाइयां मौजूद हैं उनको भी एसआरएन के डॉक्टर लिखने से परहेज करते हैं। इस वजह से जो दवाइयां यहां हैं, उनको भी लेने के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता है।
विज्ञापन



इनसेट

सरकारी सूची में शामिल हैं 500 दवाएं
इलाहाबाद। एसआरएन स्थित केंद्र में भले अभी सिर्फ 50-55 दवाइयां ही उपलब्ध हैं, जबकि सरकार की जारी सूची के मुताबिक इन केंद्रों पर ब्लड कैंसर, एलर्जी, कैंसर, ईनएनटी, त्वचा रोग, गैस्ट्रो समेत 19 विभिन्न रोगों से संबंधित करीब 500 दवाएं जनेरिक दवाओं के तौर पर शामिल की गई हैं। ब्लड कैंसर जैसी बीमारियों की दवाओं के कम कीमत में उपलब्ध होने से इन केंद्रों को लेकर काफी उम्मीद थी लेकिन सरकार इन केंद्रों तक दवा ही नहीं पहुंचा पा रही है।

000000

केंद्र में दवाइयों के न होने की सूचना मुझको भी मिली है। अथॉरिटी से बात करके यहां दवाइयों की व्यवस्था जल्द कराने की कोशिश की जाएगी।
डा.गिरिजा शंकर वाजपेई
मुख्य चिकित्साधिकारी

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें