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भुगतान न करना पड़ा महंगा, नपे अफसर

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भुगतान न करना पड़ा महंगा, नप गए अफसर
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- तीन एसटीपी के लिए नहीं हो सका 700 करोड़ का टेंडर
- ठेकेदारों की शिकायत पर कार्रवाई, शासन ने लौटाईं 8 फाइल
इलाहाबाद। नमामि गंगे योजना के तहत शहर में किए जा रहे कार्यों का भुगतान न करना गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों को महंगा पड़ गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस बारे में नाराजगी जताई तो प्रमुख सचिव नगर विकास ने इकाई के महाप्रबंधक अजेय रस्तोगी और परियोजना प्रबंधक जेपी मणि को निलंबित कर दिया। शासन स्तर पर लंबित 24 बीजक के सापेक्ष धन निर्गत किया तो पिछले दिनों 11 कार्यदायी संस्थाओं को 12 करोड़ से अधिक का भुगतान भी किया गया।
शहर में इन दिनों गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई सीवर लाइन बिछाने का कार्य करा रहा है। कुछ इलाकों में काम के बाद कार्यदायी संस्थाओं ने भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत किए तो उन्हें अफसरों ने संस्तुति के लिए स्टेट गंगा रीवर कंजर्वेशन अथारिटी( एसजीआरसीए) के पास संस्तुति के लिए भेज दिए। 30 अक्तूबर को दिल्ली में केंद्रीय विभागीय मंत्री नितिन गडकरी ने अफसरों के साथ समीक्षा के दौरान उन शिकायतों पर नाराजगी जताई, जिसमें काम होने के बाद भी भुगतान न करने की बात कही गई थी। मंत्री को अफसरों ने जानकारी दी कि एसजीआरसीए के पास बिल संस्तुति के लिए भेज दिए गए हैं। अनुमोदन के साथ धनराशि मिलते ही संबंधित संस्थाओं को भुगतान कर दिया जाएगा।
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मंत्री नाराजगी को गंभीरता से लेते हुए नगर विकास सचिव मनोज कुमार सिंह ने संबंधित प्रकरण की जांच शुरू करा दी। इस बीच एसजीआरसीए ने 11 पत्रावलियों को निस्तारण कर धनराशि जारी कर दी। साथ ही करीब 7 करोड़ के भुगतान संबंधी आठ संस्थाओं के बीजक बिना किसी टिप्पणी के वापस कर दिए। बताया गया कि अब सिर्फ भुगतान के लिए 5 पत्रावलियां ही लंबित हैं। रकम मिलते ही यहां अफसरों ने कार्यदायी संस्थाओं को 12 करोड़ से अधिक का भुगतान भी कर दिया। अफसरों ने समझा कि सब कुछ ठीक है लेकिन मंगलवार रात प्रमुख सचिव नगर विकास ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक और परियोजना प्रबंधक जेपी मणि को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। दो वरिष्ठ अफसरों के निलंबन से फिलहाल नैनी, झूंसी और फाफामऊ में बनने वाली तीन एसटीपी के लिए टेंडर जारी करने में बाधा आ सकती है। वहीं इकाई के नैनी स्थित कार्यालय में दिन भर सन्नाटा छाया रहा।

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