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तिहरे हत्याकांड में आरोपी दंपति फांसी से बरी

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तिहरे हत्याकांड में आरोपी दंपति फांसी की सजा से बरी
0 हाईकोर्ट ने दिया संदेह का लाभ, कहा अभियुक्त के खिलाफ संदेह से परे साबित नहीं हो सके साक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने तीन रिश्तेदारों की हत्या के आरोपी कानपुर के राशिद और उसकी पत्नी शकीला को राहत देते हुए अपराध से दोषमुक्त कर दिया है। ट्रायल कोर्ट कानपुर ने राशिद को दी गई फांसी और शकीला को सुनाई गई उम्र कैद की सजा माफ कर दी है। दोनों की अपील और फांसी के रेफरेंस पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति डीके सिंह की पीठ ने सुनवाई की। राशिद पर अपनी सास और दो सालों की गलाकाट कर हत्या करने का आरोप था। हाईकोर्ट ने अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने फैसला देने में गलती की है। अभियुक्तों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य संदेह से परे साबित नहीं हो सके है। जिन हालात में हत्या की गई, उससे यह नहीं कहा जा सकता है कि इस मामले में आरोपियों के अलावा कोई दूसरा नहीं हो सकता है। कोर्ट ने छह साल के चश्मदीद नाबालिग गवाह के बयान को भी संदेह से परे नहीं माना।
मामले के अनुसार कानपुर नगर के ग्वालटोली थाने में आनंद प्रकाश ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी की वह मछली टोला स्थित फरहत इंटेरप्राइजेज में काम करता है। वहां सैंडल बनाई जाती है। छह मार्च 2013 को सुबह करीब 11 बजे जब वह फैक्ट्री पहुंचा तो ताला बाहर से बंद था। उसी समय फैक्ट्री मालिक कामरान भी आ गया। ताला खोल कर भीतर जाने पर वहां रक्तरंजित तीन लाशें पड़ी थीं, इसमें से एक लाश महिला की थी और दो पुरुषों की। फैक्ट्री का चौकीदार राशिद और उसकी पत्नी शकीला मौके से गायब थे। बाद में पता चला की तीनों लाशें राशिद की सास जैनब और सालो रियाज तथर इब्राहिम की थी। तीनों की गला काट कर हत्या की गई थी।
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अभियोजन ने राशिद और शकीला पर केस दर्ज कर उनको गिरफ्तार कर लिया। अपराध साबित करने के लिए राशिद के नाबालिग साले छह साल के सद्दाम को चश्मदीद गवाह के तौर पर पेश किया गया जो घटना के समय वहां मौजूद था। सद्दाम ने बताया कि राशिद ने ही तीनों को गलाकाट कर मारा है और उस वक्त शकीला उसकी मदद कर रही थी। अदालत को बताया कि गया कि राशिद कुछ माह पूर्व शकीला को अपने साथ भगा लाया था। घर वालों को जब पता चला कि वह दोनों कानपुर में हैं तो उनकी तलाश करते हुए मां जैनब और दोनों साले और नाबालिग सद्दाम वहां पहुंचे । इस पर राशिद ने उन तीनों को मार दिया। सद्दाम का कहना था कि वह इसलिए बच गया क्योंकि शकीला ने उसे कंबल डाल कर दूसरे कमरे में छिपा दिया था।
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अभियोजन ने अपना केस साबित करने के लिए अन्य गवाह भी पेश किए । कोर्ट ने कहा कि नाबालिग की गवाही अन्य परिस्थिति जन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाती है। एक ही व्यक्ति ने एक समय में तीन लोगों की हत्या अकेले कर दी इसे साबित करने योग्य साक्ष्य अभियोजन नहीं दे पाया है। दोनों की सजा माफ करते हुए रिहा करने का आदेश दिया है।
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