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एएसआई में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी श्रमिका को राहत

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एएसआई में कार्यरत श्रमिकों को पुननिर्युक्ति का आदेश
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औद्योगिक अधिकरण के खिलाफ एएसआई की याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने औद्योगिक अधिकरण द्वारा कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए निर्णय को सही करार दिया है। कोर्ट ने अधिकरण के आदेश को चुनौती देने वाली एएसआई की याचिका खारिज कर दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर ने सुनवाई की।
दैनिक वेतन भोगी कर्मियों की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता विपिन चंद्र पाल का कहना था कि श्रमिकगण 1987 से 1997 तक समय समय पर आगरा और अन्य स्थानों पर एएसआई द्वारा बगीचे के रखरखाव और स्मारकों के संरक्षण के कार्य में नियोजित किए जाते रहे। उनकी सेवाएं एक फरवरी 1997 से समाप्त कर दी और पुन: काम पर नहीं रखा गया। जबकि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25 एच के तहत श्रमिक पुर्ननियुक्ति पाने के हकदार हैं। एएसआई ने इसका विरोध किया कि वह उद्योग की श्रेणी में नहीं आता है। इसके जवाब में कोर्ट को बताया कि चूंकि एएसआई की इन बागीचों और स्मारकों से आमदनी होती है इसलिए यह उद्योग की श्रेणी में आएगा।
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प्रदेश सरकार ने मामला औद्योगिक विवाद अधिकरण के पास भेजा था जहां से श्रमिकों के पक्ष में निर्णय हुआ। एएसआई ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि श्रमिक किसी पद विशेष पर नियुक्ति की मांग नहीं कर रहे हैं। वह सिर्फ 17 मार्च 2003 के ऑफिस मेमोरेंडम के आधार पर पुनर्नियुक्ति चाहते हैं। कोर्ट ने कहा कि अधिकरण के 27 नवंबर 2012 के निर्णय में कोई अवैधानिकता नहीं है।
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