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हॉस्टल की मेरिट में शामिल नहीं हो सकता था रजनीकांत
0 हॉस्टल आवंटन के लिए रजनीकांत को कट ऑफ से कम मिले थे अंक
0 पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने दी रिपोर्ट, इविवि के माहौल पर जताई चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हॉस्टल न मिलने से हताश होकर आत्महत्या करने वाले छात्र रजनीकांत यादव के मामले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कुलपति को दे दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हॉस्टल आवंटन के लिए जो कटऑफ निर्धारित किया गया था, रजनीकांत के अंक उससे काफी कम थे। ऐसे में उसे हॉस्टल आवंटित नहीं हो सकता था। कमेटी ने इस घटना को लेकर इविवि के मौजूदा माहौल पर चिंता जताई है।
जांच कमेटी में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुब, डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार समेत प्रो. अरके सिंह, प्रो. एसआई रिजवी एवं डॉ. आरके सिंह शामिल थे। कमेटी की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 29 जुलाई को डीएसडब्लयू कार्यालय की ओर से हॉस्टल में प्रवेश लेने वालों छात्रों को कोई सूची केपीयूसी छात्रावास को नहीं भेजी गई थी। ऐसे में कोई छात्र प्रवेश के लिए अर्हता का दावा नहीं कर सकता। इसके अलावा ओबीसी छात्रों के हॉस्टल में प्रवेश के लिए कटऑफ 140 अंक निर्धारित किया गया था और रजनीकांत को 93.57 अंक मिले थे, सो वह हॉस्टल में प्रवेश के लिए अर्हता ही नहीं रखते थे।
कमेटी की ओर से इविवि के वर्तमान माहौल पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि विश्वविद्यालय में परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ऐसे में धरना-प्रदर्शन पूरी तरह से अनुचित है। इससे परीक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं। कमेटी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मानवीय आधार पर रजनीकांत के परिजनों को 50 हजार रुपये का चेक दिया गया है। साथ ही रजिस्ट्रार को भी कमेटी ने सलाह दी है कि राज्य एवं केंद्र सरकार से उचित मुआवजा दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा जाए। कमेटी ने रजनीकांत की आत्महत्या को दुर्भाग्यपूर्ण मानते हुए कहा है कि इस घटना में विश्वविद्यालय या हॉस्टल किसी भी स्तर पर जिम्मेदार नहीं हैं।
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आमरण अनशन पर बैठे रजनीकांत के परिजन, छात्र
- रजनीकांत को न्याय दिलाने के लिए परिजनों समेत छात्रों ने क्रमिक अनशन को अब आमरण अनशन में बदल दिया है। रजनीकांत के पिता ने कहा कि अन्य किसी बच्चे के साथ इस तरह की घटना न हो, इसलिए वह अनशन पर बैठे हैं। उन्हें नहीं मालूमू था कि इविवि प्रशासन इतना असंवेदनशील हो सकता है। उनके साथ आमरण अनशन में शामिल छात्र नेता नेहा यादव, अखिलेश यादव, शक्ति रजवार, सौरभ विश्वकर्मा, अजय पांडेय आदि ने मांग की है कि हॉस्टल न मिलने पर छात्रों को दो हजार रुपये डेलीगेसी भत्ता दिया जाए और रजनीकांत के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
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अनशनकारियों पर एफआईआर के लिए दी तहरीर
- छात्र रजनीकांत को न्याय दिलाने के लिए डीएसडब्ल्यू कार्यालय के सामने अनशन पर बैठे छात्र नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए इविवि प्रशासन की ओर से कर्नलगंज थाने में तहरीर दी गई है। चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरएस दुबे की ओर से दी गई तहरीर में कहा गया है कि छात्रों की मांगों को पूरा करना विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इविवि में प्रायोगिक परीक्षाएं चल रही हैं और आठ मार्च से वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ऐसी गतिविधियों से परीक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं। इविवि प्रशासन की ओर से जिन छात्र नेताओं के खिलाफ तहरीर दी गई है, उनमें नेहा यादव, अखिलेश यादव, शक्ति रजवार, सौरभ विश्वकर्मा, अजय पांडेय, अभिषेक आर्या, दुर्गेश प्रताप सिंह एवं अभिषेक यादव शामिल हैं।