मीरगंज। नौ साल से अटके रामगंगा नदी के गोरा घाट पुल का निर्माण काफी तेज गति से चल रहा है। जानकारों का मानना है कि काम इसी स्पीड से चलता रहा तो दिसंबर 2020 की निर्धारित अवधि से पहले ही निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। पुल निर्माण के लिए शासन से 41 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।
आंवला-मीरगंज तहसीलों के 250 से ज्यादा गांवों को उत्तराखंड, दिल्ली-लखनऊ से सीधे जोड़ने वाले रामगंगा नदी के गोरा घाट पुल का शिलान्यास वर्ष 2009 में बसपा शासन में हुआ था। वर्ष 2010 में पुल निर्माण कार्य शुरू भी हो गया। उस वक्त पुल के 18 सीमेंटेड पिलर्स (गोले) बनाने का एस्टीमेट स्वीकृत हुआ था लेकिन वर्ष 2011 में विनाशकारी बाढ़ के चलते निर्माण कार्य रोक दिया गया। बाढ़ उतरने पर वर्ष 2012-13 में दोबारा काम शुरू हुआ लेकिन बाढ़ की वजह से पुल की लंबाई बढ़ गई और बजट कम पड़ गया। लिहाजा निर्माण कार्य फिर रुक गया। तब से पुल निर्माण अधर में ही लटका हुआ था। दिसंबर 2018 में शासन से पुल निर्माण की घोषणा होने पर इलाके में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। 14 जनवरी 19 को मकर संक्रांति पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने शिलान्यास किया। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो गया। इन दिनों निर्माण कार्य काफी तेजी से चल रहा है। आठ नए सीमेंटेड पिलर्स में से चार का निर्माण कार्य जारी है। रोजाना तीन से चार ट्रक निर्माण सामग्री यहां पहुंच रही है।
पूर्व प्रधान ने दिया था 19 दिन तक धरना
जून 16 में गोरा पुल निर्माण संघर्ष समिति गठित कर संयोजक-पूर्व प्रधान गोरा बाबूराम तुरैहा ने 19 दिन तक गोरा घाट पर पुल निर्माण की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया था। धरने में भूड़ा बसंतपुर, गोरा, बहरोली, सिरोधी अंगदपुर समेत दोनों तहसीलों के कई दर्जन गांवों के सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन, तत्कालीन विधायक सुल्तान बेग, मौजूदा विधायक डॉ. डीसी वर्मा और भाजपा-कांग्रेस समेत विभिन्न राजनैतिक दलों के तमाम अन्य राजनेता भी धरना-स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन देते रहे थे। हालांकि सपा सरकार की बेरुखी के चलते पुल निर्माण शुरू नहीं हो सका था। पुल निर्माण कार्य तेजी से चलने पर बाबूराम तुरैहा, बहरोली प्रधान अशोक मोहन गंगवार, रामकिशोर गंगवार, तेजपाल फौजी, राजीव गंगवार, सत्यदेव गंगवार, लेखराज कश्यप आदि ने सेतु निगम अफसरों की हौसलाअफजाई करते हुए खुशी का इजहार किया है।