केंद्रीय टीम की जांच में भी गेहूं की उपज काफी कमजोर पाई गई है। मंगलवार को हुई जांच में सभी 12 नमूने फेल पाए गए। टीम यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। इसके बाद जल्द ही गेहूं खरीद के मानक में कुछ छूट की उम्मीद है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से गेहूं की उपज को काफी नुकसान हुआ है। उपज पतली हो गई है और मानक के अनुरूप नहीं है। नियमानुसार सिकुड़न अधिकतम छह प्रतिशत होनी चाहिए लेकिन पूर्व में प्रशासन की ओर से कराई गई जांच में सभी नमूने फेल पाए गए थे। इस आधार पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने गेहूं लेने से भी मना कर दिया था। इससे गेहूं खरीद भी प्रभावित हो गई तथा लक्ष्य के अनुरूप कम खरीद के पीछे इसे मुख्य वजह माना जा रहा है।
इसके बाद प्रशासन की ओर से मानक को शिथिल करने की मांग से संबंधित शासन को पत्र लिखा गया था। इसके बाद शासन की ओर से केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया था। इसी क्रम में केंद्रीय टीम ने मंगलवार को 12 नमूनों की जांच की। नमूने जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के गोदाम से लिए गए थे। सभी में सिकुड़न की मात्रा 10 से 15 फीसदी तक पाई गई है। अब यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। माना जा रहा है कि इस आधार पर सरकार गेहूं खरीद के नियमों को शिथिल कर सकती है। हालांकि, एफसीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक अंकुश सिंघला का कहना है कि इस बार गेहूं की उपज कमजोर हुई है। उसी की जांच के लिए टीम आई थी। गेहूं के नमूने ले लिए हैं। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट के आधार पर सरकार निर्णय लेगी।