पॉक्सो कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में होगी अपील
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति की नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुराचार के आरोपी की पॉक्सो विशेष कोर्ट द्वारा खारिज जमानत अर्जी के खिलाफ हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल होगी। ऐसी अर्जी पोषणीय है। कोर्ट ने कहा कि एससीएसटी एक्ट में विशेष अदालत गठित कर विचारण करने का कानून है और पॉक्सो एक्ट में भी विशेष अदालत में नाबालिग के विरुद्ध अपराध की सुनवाई का अधिकार दिया गया है। यदि एससी की नाबालिग लड़की के रेप केस में पॉक्सो एक्ट की विशेष कोर्ट में अर्जी सुनी गई है तो उस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी दी जाएगी। इस आदेश से पॉक्सो एक्ट के तहत दाखिल जमानत अर्जियों पर होने आदेश को चुनौती देने के लिए भ्रम समाप्त हो गया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने रिंकू की जमानत अर्जी पर दिया है। अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी। अर्जी पर अधिवक्ता राजीव लोचन शुक्ल और चेतन चटर्जी ने न्यायमित्र के रूप में कोर्ट को सहयोग दिया। रिंकू पर आरोप है कि सात जुलाई 2017 को अपने दोस्त के साथ मिलकर नाबालिग लड़की के साथ दुराचार किया। घटना की प्राथमिकी सीजेएम के हस्तक्षेप के बाद 26 अगस्त 2017 को दर्ज की गई। कोर्ट के समक्ष प्रश्न था कि एससी-एसटी एक्ट के अपराध में जमानत अर्जी निरस्त होने पर अपील हाईकोर्ट में होती है तो जमानत अर्जी पोषणीय नहीं है। याची का कहना था पॉक्सो एक्ट के तहत विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल होगी।