बरेली के ध्यानार्थ
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गवाह विश्वसनीय तो संबंधी होने
से कमजोर नहीं होगा साक्ष्य: कोर्ट
0 चाचा के हत्यारे की अपील खारिज, उम्रकैद की सजा बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि गवाह की मौके पर उपस्थिति विश्वसनीय है तो उसका साक्ष्य इस आधार पर कमजोर नहीं माना जाएगा कि वह मरने वाले का निकट संबंधी या रिश्तेदार है। इस दृष्टांत के आलोक में कोर्ट ने बरेली के शिशुपाल की आपराधिक अपील खारिज करते हुए उसे मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अपील पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की पीठ ने सुनवाई की।
शिशुपाल को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बरेली ने 30 नवंबर 2013 को अपने चाचा की हत्या के जुर्म में उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। बरेली के भमोरा थानाक्षेत्र के मृतक नेतराम की पत्नी रुनका देवी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, उसके सगे भतीजे शिशुपाल की उसकी जमीनें हड़पने की नीयत थी चूंकि उनके कोई संतान नहीं है, इसलिए शिशुपाल जमीनें हड़पना चाहता था। इसी नीयत ने 11 अक्तूबर 2010 को सुबह शिशुपाल ने घर के पिछवाड़े सो रहे नेतराम के सिर पर ईंट से प्रहार कर उसकी हत्या कर दी। पति की चींख सुनकर वह बाहर निकली तो देखा शिशुपाल नेतराम को मार रहा था। इसके बाद वह भाग गया।
अधीनस्थ न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर शिशुपाल को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई। अपीलार्थी के पक्ष से कहा गया कि चश्मदीद गवाह रुनका देवी की मौके पर उपस्थिति संदिग्ध है। वह मृतक की पत्नी है, इसलिए उसकी गवाही नहीं मानी जा सकती है। कोई अन्य स्वतंत्र चश्मदीद साक्षी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयान से रुनका देवी की मौके पर उपस्थिति साबित होती है, इसलिए सिर्फ मृतक की करीबी संबंधी होने के आधार पर उसकी गवाही को संदिग्ध नहीं माना जा सकता है।