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13 सवालों को विशेषज्ञ के पास भेजने से इंकार
0 हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज की
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने टीइटी-2018 के 13 सवालों को विशेषज्ञ की राय के लिए भेजने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में एकल न्यायपीठ के आदेश को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि फैसले में कोई त्रुटि नहीं है, इसलिए हस्तक्षेप का आधार नहीं है। टीईटी में असफल सैकड़ों अभ्यर्थियों ने विशेष अपील दाखिल कर एकलपीठ के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कुछ सवालों को पाठ्यक्रम से बाहर का मानने से भी इंकार कर दिया और कहा कि ये प्रश्न सामान्य अध्ययन के अंग्रेजी विषय के हैं।
कोर्ट ने 15 सवालों में से केवल दो पर दोबारा राय लेने के आदेश को सही करार दिया और कहा कि कोर्ट विशेषज्ञ नहीं हो सकती। विशेषज्ञों की राय अंतिम होगी। अपील में उठाए गए मुद्दों को कोर्ट ने बलहीन माना है और कहा कि टीईटी हर साल होता है। असफल छात्रों के लिए कोर्ट अंतर्निहित शक्तियों का बिना ठोस वजह के प्रयोग नहीं कर सकती। याचीगण अगले वर्ष भी परीक्षा में बैठ सकते हैं। सवाल गलत साबित करने का भार वादकारी पर है। यदि विशेषज्ञ की राय सवालों के पक्ष में है तो कोर्ट उसे ही मानेगी। जब तक कोई अवैधानिकता स्पष्ट रूप से न हो कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
हिमांशु गंगवार सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति राजीव रंजन अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की। टीईटी 2018 के 15 सवालों पर आपत्ति की गई थी। इस पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज ने विशेषज्ञ पैनल गठित किया। जिसने आपत्तियों पर विचार कर निस्तारित कर दिया। 13 सवाल सही पाए गए। एकल न्यायपीठ ने सिर्फ दो सवालों पर विषय विशेषज्ञ की राय लेने को कहा। इस आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी गई कि एकलपीठ को सभी 15 सवालों पर विषय विशेषज्ञ की राय लेनी चाहिए थी। कहा गया कि कुछ सवाल सिलेबस से बाहर के हैं। विशेषज्ञ इसे सिलेबस के बाहर का नहीं मानते। कोर्ट ने कहा सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के आलोक में विशेषज्ञ राय अंतिम होगी। अपीलें खारिज कर दी हैं। छह जनवरी को होने वाली सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा नियत कार्यक्रम के अनुसार होगी।