दो विद्यालय से किया आवेदन तो होगा निरस्त
यूपी बोर्ड की परीक्षा में नकल के जुगाड़ में ऐसा करना वाले छात्र-छात्राओं की बढ़ी मुश्किल
ऐसे विद्यार्थियों के दोनों पंजीकरण होंगे निरस्त, बोर्ड ने तय की प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में नकल के जुगाड़ में एक से अधिक विद्यालयों में पंजीकरण कराना या एक ही विद्यालय में दो बार पंजीकरण कराना अभ्यर्थियों को महंगा पड़ेगा। ऐसा करने वाले अभ्यर्थियों के दोनों पंजीकरण निरस्त होंगे। एक से अधिक जिन भी विद्यालयों से पंजीकरण कराया जाएगा वहां के प्रधानाचार्य के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। यूपी बोर्ड ने विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को ऐसे विद्यार्थियों की जांच का निर्देश दिया है।
यूपी बोर्ड की परीक्षा में नकल का बड़ा खेल होता है। काफी विद्यालय ऐसे हैं जहां हाईस्कूल की परीक्षा पास कराने के लिए बकाया रेट तय होता है। इसके बाद छात्र-छात्राओं के पंजीकरण किए जाते हैं। पास कराने की गारंटी देने वाले विद्यार्थियों का एक से अधिक विद्यालयों में पंजीकरण कराते हैं। इसके पीछे कारण यह होता है कि जिस विद्यालय में नकल की सेटिंग हो गई वहां से परीक्षा दिला दी। इस तरह का खेल ज्यादातर वित्त विहीन विद्यालयों में होता है। पिछले वर्ष की परीक्षा में भी काफी ऐसे विद्यार्थियों का पता चला था जिन्होंने दो या उससे अधिक विद्यालयों में अग्रिम पंजीकरण कराया था। ऐसे में इस बार यूपी बोर्ड पहले से सतर्क हो गया है।
बोर्ड ने वर्ष 2018 की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में शामिल होने के लिए दो बार पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थियों के नाम जांच के बाद मुख्य डाटा से हटा दिया गया और विद्यालय के होमपेज पर दर्शाया गया। साथ ही बोर्ड ने प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारी तय कर दी। उन्हें निर्देश दिया गया है कि दो या दो अधिक विद्यालयों से अग्रिम पंजीकरण कराने वाले विद्यार्थियों के विवरण की जांच करें। यदि ऐसे विद्यार्थी विद्यालय छोड़ चुके हैं तो उनके नाम तत्काल डिलीट किए जाएं, जिससे विद्यार्थी के नाम को दूसरे विद्यालय के प्रधानाचार्य जहां विद्यार्थी वास्तव में अध्ययन कर रहा है, उसके डाटा को रिस्टोर करके 2018 की परीक्षा में शामिल कर सकें। बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने साफ किया है कि दो या उससे अधिक विद्यालयों से अग्रिम पंजीकरण कराने वाले विद्यार्थियों की सूची पर तय समय के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो बोर्ड ऐसे विद्यार्थी का विवरण डिलीट कर देगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रधानाचार्य और विद्यार्थी की होगी।