पांच दिन शेष, माइग्रेशन को आगे नहीं आ रहे छोटे व्यापारी
0 वाणिज्य कर विभाग के अफसरों के लिए चुनौती बना ऐसा व्यापारियों का जीएसटी माइग्रेशन
0 बाजार, कस्बों में जाकर व्यापारियों को जागरूक कर रहे अफसर, बता रहे जीएसटी के फायदे
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। एक जुलाई से पूरे देश में जीएसटी लागू होने जा रहा है लेकिन प्रदेश में बड़ी संख्या में व्यापारियों ने अब तक जीएसटी में माइग्रेशन नहीं कराया है। इसमें ज्यादातर ऐसे छोटे व्यापारी हैं, जिनका सालाना टर्नओवर 20 लाख से कम है। इलाहाबाद में यही स्थिति है। केंद्र सरकार ने जीएसटी में माइग्रेशन के लिए 15 जून तक की मोहलत दी है। इसमें अब पांच दिन शेष बचे हैं लेकिन इलाहाबाद में छोटे व्यापारी जीएसटी में माइग्रेशन के लिए आगे नहीं आ रहे है। ऐसे में अफसरों के सामने इन व्यापारियों का माइग्रेशन कराना चुनौती बन गया है।
इलाहाबाद जोन में इलाहाबाद समेत फतेहपुर, कौशाम्बी और प्रतापगढ़ जिले आते हैं। जोन में तकरीबन 36 हजार व्यापारी पंजीकृत हैं। विभाग में पंजीकृत हर व्यापारी को जीएसटी में माइग्रेशन कराना अनिवार्य है, सो ज्यादातर को जीएसटी में माइग्रेशन के लिए पासवर्ड भी जारी कर दिए गए हैं। जिन्हें पासवर्ड नहीं मिल सके हैं, विभाग के अफसर शिविर लगाकर, कार्यालय में हेल्पडेस्क के जरिए यह काम कर रहे हैं लेकिन सालाना 20 लाख से कम आय वाले व्यापारियों का जीएसटी माइग्रेशन कराना अफसरों के लिए चुनौती साबित हो रहा है।
इस श्रेणी के व्यापारी ज्यादातर माल स्थानीय स्तर पर ही खरीदते-बेचते हैं सो वे जीएसटी के फायदे नुकसान की भी चिंता नहीं कर रहे। इसकी वजह से जीएसटी माइग्रेशन में भी खास रुचि नहीं ले रहे। हालांकि विभाग के अफसर बाजारों, कस्बों में जाकर व्यापारियों को जीएसटी माइग्रेशन कराने के लिए जागरूक कर रहे हैं। एडीशनल कमिश्नर ग्रेड टू एलआर गुप्ता का कहना है कि वाणिज्य कर विभाग में पंजीकृत जिन व्यापारियों ने माइग्रेशन नहीं कराया, उनके लिए जीएसटी में कारोबार करना मुश्किल होगा। ऐसे व्यापारियों का टिन भी निरस्त किया जाएगा।