तहसील में 106 लेखपालों के सापेक्ष 40 लेखपाल काम कर रहे हैं। ऐसे में 395 गांवों के कामकाज की जिम्मेदारी 40 लेखपाल के सहारे चल रही है। इस तरह से 10 से 15 गांवों की जिम्मेदारी एक लेखपाल के कंधे पर है।
एक लेखपाल ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वह व्यवस्था को लेकर थक चुके हैं। ज्यादा काम के बोझ से वह परेशान हैं। उप्र लेखपाल संघ इकाई मेजा के अध्यक्ष धवल पांडेय ने बताया कि कई बार लेखपालों की नियुक्ति की मांग की गई लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हो सका।
इधर, नेवढि़या गांव के ग्रामीण सौरभ पांडेय ने बताया कि लेखपाल कभी भी गांव नहीं आते हैं। कोई भी राजस्व का काम हो तो लेखपाल को ढूंढ़ते रहिए। उनका पता ही नहीं चल पाता है। इसकी शिकायत एसडीएम से की गई है। वहीं धवल पांडेय ने बताया कि लेखपालों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। लेखपालों ने उप्र लेखपाल संघ के बैनर तले जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। एसडीएम सुरेंद्र प्रताप यादव ने बताया कि लेखपालों की नियुक्ति के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही समस्या दूर होने की उम्मीद है।