वाराणसी के लिए खास
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बीएचयू के विधि छात्रों को हाईकोर्ट से राहत
0 अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर अटेेंडेंस पूरी करने का आदेश
0 परीक्षा में शामिल करने से रोकने के आदेश को किया रद्द
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के पांचवें सेमेस्टर के विधि छात्रों को राहत देते हुए उनको परीक्षा में शामिल करने से रोेकने का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि शनिवार और रविवार तथा अन्य छुट्टियों को अतिरिक्त कक्षाएं चलाई जाएं, ताकि 40 फीसदी उपस्थिति पूरी करने का छात्रों को अवसर मिल सके। कोर्ट ने सभी छात्रों को भी एक्स्ट्रा क्लास लेने का आदेश दिया है और कहा कि जो छात्र 40 प्रतिशत उपस्थिति पूरी करने में विफल होंगे विश्वविद्यालय को उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की छूट होगी।
कोर्ट ने पांचवें सेमेस्टर की विशेष परीक्षा लेने का भी निर्देश दिया है। परिणाम के बाद छठवें सेमेस्टर की परीक्षा लेने और बैकलाग परीक्षा से पहले परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया है। कहा कि बैकलाग परीक्षा पास होने पर ही डिग्री दी जाय। कोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्धारित संख्या में क्लास न लेने और उपस्थिति कम होने के आधार पर परीक्षा में बैठने न देने के आदेश अवैध और मनमानापूर्ण करार दिया है तथा छात्रों की याचिका मंजूर कर ली है ।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने शेखर कुमार सिंह और दो अन्य छात्रों की याचिका पर दिया है। याचिका में याचियों की पांचवें सेमेस्टर में 40 प्रतिशत उपस्थिति न होने के कारण परीक्षा में बैठने से रोकने को चुनौती दी गई थी। याचियों का कहना था कि विश्वविद्यालय को सेमेस्टर में 450 लेक्चर होने चाहिए, किंतु 261 लेक्चर ही हुए हैं। छात्रों को उपस्थिति पूरी करने की पूर्व में सूचना भी नहीं दी गई। विश्वविद्यालय क्लास नहीं ले पा रहा और छात्रों की कम उपस्थिति पर उन्हें परीक्षा देने से रोक रहा है, जो मनमानापूर्ण है। विवि के नियमानुसार सेमेस्टर में 40 फीसदी और सत्र में 70 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य है। याचियों का आरोप था कि निर्धारित लेक्चर नहीं दे पाने वाला विश्वविद्यालय न्यूनतम उपस्थिति के लिए बाध्य कर रही है। कोर्ट ने इसे सही नहीं माना और छुट्टियों में एक्स्ट्रा क्लास लेकर उपस्थिति पूरी करने का अवसर देने का निर्देश दिया है।