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देरी से पहुंची डाक, मुख्य महाप्रबंधक पर 25 हजार हर्जाना
0 देरी से पहुंची डाक को स्वीकार करने में विवेक का प्रयोग करे आयोग: कोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। न्यायिक सेवा परीक्षा के अभ्यर्थी की डाक लोक सेवा आयोग तक पहुंचाने में देरी करने पर हाईकोर्ट ने मुख्य डाक महाप्रबंधक लखनऊ पर 25 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने यह राशि दो माह में याची को देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि डाक पहुंचाने में देरी के लिए निर्धारित मुआवजा एक हजार रुपये बढ़ाया जाए। कोर्ट ने लोक सेवा आयोग को भी हिदायत दी है कि समय से भेजी गई डाक यदि कुछ विलंब से प्राप्त होती है तो उसे विलंब की माफी के लिए वह विवेकाधिकार का प्रयोग करे और इस संबंध में नियम बनाए जाएं।
डाक विभाग की गलती का खामियाजा बेकसूर अभ्यर्थी को न भुगतना पड़े इसलिए ऐसा करना आवश्यक है। हालांकि कोर्ट ने आयोग को अभ्यर्थी का आवेदन स्वीकार करने का आदेश देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि पत्र पहुंचाने वाली एजेंसी पत्र भेजने वाले का एजेंट होती है न कि पत्र प्राप्त करने वाले का। ऐसे में पत्र भेजने वाले की एजेंसी द्वारा की गई गलती के लिए डाक पाने वाले को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। हापुड़ की सेतु सिंह की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने दिया है।
याची ने पीसीएस प्री परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मुख्य परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया और हार्डकॉपी डाक से लोक सेवा आयोग को भेजी। आवेदन पत्र 28 जनवरी तक आयोग में पहुंच जाना चाहिए था। मगर यह 29 जनवरी को दिन में 11 बजे आयोग में पहुंचा। इसकी वजह से याची मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी। याचिका में कहा गया कि दो तीन दिन के विलंब से पहुंचने वाली डाक को स्वीकार किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें याची की कोई गलती नहीं है। कोर्ट ने डाक विभाग से ब्यौरा मांगा था जिससे पता चला कि गलती डाक विभाग की है। इस पर कोर्ट ने कहा कि याची डाक विभाग से मुआवजा पाने की हकदार है।