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अमरूद नहीं मूज बनेगा इलाहाबाद की पहचान

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अमरूद नहीं मूज होगी शहर की पहचान
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0 ‘एक जनपद एक उत्पाद’ के अंतर्गत चयन, मंत्री ने ली बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबादी अमरूद नहीं मूज यहां की पहचान बनेगी। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘एक जनपद एक उत्पाद’ के अंतर्गत इलाहाबाद के लिए मूज का चयन किया गया है। नैनी में मूज का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है और इसके प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। इसके मद्देनजर इसका चुनाव हुआ है। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन मंत्री सत्यदेव पचौरी ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना की समीक्षा की।
मंत्री ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मूज के प्रचार-प्रसार और बाजार उपलब्ध कराने की बात कही। बताया कि प्रदर्शनी आदि में भाग लेने के लिए अनुदान दिया जाएगा। किसानों की मांग पर उन्होंने मूज के भंडारण के लिए डिपो की स्थापना का आश्वासन दिया। ताकि, पूरे वर्ष मूज की उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर का उत्पाद बनाने के लिए कारीगरों को उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट डिजाइन की ओर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके अलावा कलरिंग का भी अलग से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण गांव में ही मिलेगा। इस मौके पर कारीगरों ने उत्पाद का प्रदर्शन भी किया। उपायुक्त उद्योग अजय चौरसिया ने बताया कि मंत्री के निर्देश के अनुसार प्रशिक्षण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। बैठक में संयुक्त आयुक्त उद्योग सुधांशु तिवारी तथा मंडल के कई अफसर और कारीगर शामिल रहे।
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जिले में 700 से अधिक कारीगर
0 मूज से डलिया, सूप, पेपर वेट, लैंप आदि सामान बनाए जाते हैं। डांडी के महेवा गांव का हर परिवार इससे जुड़ा हुआ है। इसके अलावा आसपास के कई परिवारों के लिए भी जीवन का यह मुख्य आधार है। उपायुक्त उद्योग अजय चौरसिया ने बताया कि 700 से अधिक कारीगर इससे जुड़े हैैं। इस उद्योग के विकास की बहुत संभावना है।

मूज उत्पादन की अपार संभावना
0 मूज नदियों और नहरों के किनारे बड़े पैमाने पर पाया जाता है। इस लिहाज से इलाहाबाद में इसकी भरपूर संभावना है। योजना के अंतर्गत उत्पादन बढ़ाने में अब सरकार भी मदद देगी।
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अमरूद की प्रोसेसिंग यूनिट के लिए आगे नहीं आए किसान
इलाहाबादी अमरूद की पूरी दुनिया मुरीद है, लेकिन किसान इससे जैम, जेली आदि दूसरे उत्पाद तैयार करने के लिए राजी नहीं हैं। कोई भी किसान यूनिट बैठाने के लिए आगे नहीं आया। जबकि, ‘एक जनपद एक उत्पाद’ योजना की शर्त है कि रॉ मैटीरियल से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएं। ऐसे में ‘एक जिला एक उत्पाद’ के अंतर्गत अमरूद के बजाय मूज का चयन किया गया। वहीं मंडल के अन्य जिलों प्रतापगढ़ में आंवला, कौशाम्बी में केला तथा फतेहपुर में स्टील फैब्रिकेशन को चुना गया है।
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