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पहले इविवि की साख गिरी, फिर प्रवेश की मेरिट

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पहले इविवि की साख गिरी, फिर प्रवेश की मेरिट
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0 प्रवेश प्रक्रिया पर दिख रहा एनआईआरएफ रैंकिंग का असर
0 ‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ में प्रवेश के लिए ढूंढ़ने पड़ रहे विद्यार्थी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की ओर से जारी विश्वविद्यालयों की रैंकिंग का असर इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की प्रवेश प्रक्रिया पर दिख रहा है। पिछली बार इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बीकॉम और बीएससी में प्रवेश के लिए मारामारी थी लेकिन इस दफे प्रवेश के लिए अभ्यर्थी नहीं मिल रहे और विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रवेश के लिए मेरिट गिरानी पड़ ही है।
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एजेंसी एनआईआरएफ की ओर से जारी वर्ष 2017 की रैंकिंग में टॉप 100 विश्वविद्यालयों में इलाहाबाद विश्वविद्यालय को 95वां स्थान मिला है जबकि 2016 की रैंकिंग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय 68वें नंबर पर था। एक साल में ही विश्वविद्यालय 27 पायदान नीचे चला आया। विश्वविद्यालयों की रैंकिंग अलग-अलग मानकों के आधार पर निर्धारित की जाती है। इनमें से एक मानक पर्सेप्शन का भी होता था, जिसके तहत छात्र, शिक्षक एवं आम लोग विश्वविद्यालय के प्रति अपने विचार व्यक्त करते हैं। पर्सेप्शन में इविवि को पिछली बार की रैंकिंग में 86 अंक मिले थे जबकि 2017 की रैंकिंग में महज 2.84 नंबर मिले। साफ है कि साफ है कि शिक्षकों, छात्रों और आम लोगों के मन में ‘पूरब के ऑक्सफोर्ड’ के प्रति जो धारणा थी, वह विश्वविद्यालय की साख गिरने के साथ बदल गई। इसका असर इस बार विश्वविद्यालय में चल रही प्रवेश प्रक्रिया पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले साल तक विश्वविद्यालय में बीकॉम और बीएससी में प्रवेश के लिए जबर्दस्त मारामारी होती थी लेकिन इस बार प्रवेश के लिए छात्र-छात्राएं बहुत कम संख्या में पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि विश्वविद्यालय को बीकॉम और बीएससी की सीटें भरने के लिए मेरिट कई अंक नीचे गिरानी पड़ी, जो अमूमन नहीं होता था।
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