पराग की दही के 100 मिली और 200 मिली के पैकेट भी बाजार में उपलब्ध होंगे। लंबे समय से बंद मशीनें ठीक करा ली गई हैं। उनसे उत्पादन भी शुरू हो गया है। घाटे में चल रहे पराग की प्रयागराज इकाई को एक समय बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इसका नतीजा रहा कि 100 और 200 मिली दही के पैकेट तैयार करने वाली मशीन ही खराब हो गई और उसे ठीक नहीं कराया गया। ऐसे में उत्पादन तैयार होना बंद हो गया लेकिन अब पराग को फिर से आत्मनिर्भर बनाने की कवायद शुरू की गई है।
वर्तमान में मंडल के अंतर्गत 450 गांवों के छह हजार से अधिक पशुपालक पराग से जुड़े हैं। इनसे रोजाना करीब 15 हजार लीटर दूध लिया जाता है। महाप्रबंधक एके शर्मा का कहना है कि मशीन बन गई है। उत्पाद भी तैयार होने लगे हैं। इसके अलावा पराग के बूथों से मक्खन के 100 ग्राम के पैकेट की भी बिक्री की जाएगी। 100 ग्राम का पैकेट मेरठ स्थित पराग की डेयरी से आएंगे।