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प्रयागराज : बारिश-ओलावृष्टि से 10 हजार प्रभावित, बीमा का लाभ दो हजार किसानों को भी नहीं

Thu, 23 Mar 2023 11:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बारिश और ओलावृष्टि की वजह से 10 हजार से अधिक किसानों की फसल बर्बाद हो गई है। ये वे किसान हैं जिन्हें राजस्व विभाग की ओर से तो आर्थिक मदद दी जाएगी लेकिन सभी को बीमा योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
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फसल में भरा पानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बारिश और ओलावृष्टि की वजह से 10 हजार से अधिक किसानों की फसल बर्बाद हो गई है। ये वे किसान हैं जिन्हें राजस्व विभाग की ओर से तो आर्थिक मदद दी जाएगी लेकिन सभी को बीमा योजना का लाभ नहीं मिलेगा। बारिश एवं ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, चना, राई आदि फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। यहां गौर करने वाली बात यह है भी कि बेमौसम बारिश से नुकसान झेलने वाले 10 हजार वे किसान हैं जिनकी फसल को 33 फीसदी या इससे अधिक नुकसान हुआ है।

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नुकसान उठाने वाले वास्तविक किसानों की संख्या कहीं अधिक है लेकिन फसल बीमा योजना का लाभ दो हजार किसानों को भी मिलता नहीं दिख रहा। पिछले दिनों लगातार दो दिनों तक हुई बारिश एवं ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, चना, राई आदि फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। इसकी वजह से कोरांव, मांडा, करछना, हंडिया तहसील के 211 ग्राम सभाओं में फसलों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है।

राजस्व विभाग की ओर से कराए गए सर्वे के अनुसार कोरांव, मांडा और हंडिया के 10030 किसान ऐसे किसान हैं जिनकी 33 फीसदी से अधिक फसल बर्बाद हो गई है। इन्हें करीब साढ़े छह करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाएगा। इनके अलावा कृषि विभाग एवं बीमा कंपनी की ओर से भी सर्वे कराया जा रहा है। जहां 50 फीसदी या इससे अधिक फसल को नुकसान हुआ है, वहां किसानों को फसल बीमा योजना के तहत भी मुआवजा दिया जाएगा लेकिन इसका लाभ बहुत कम संख्या में किसानों को मिलता दिख रहा है।

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बारिश से खेत में गिरी गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला

विभाग की ओर से 211 ग्राम पंचायतों में नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। फिलहाल की रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 22 ग्राम पंचायतों में ही 50 फीसदी या इससे अधिक फसल बर्बाद हुई है। इन पंचायतों में जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है, उन्हें ही योजना का लाभ मिलेगा। ऐसे किसानों का विवरण एकत्रित किया जा रहा है। फसली बीमा का लाभ लेने के लिए किसानों को व्यक्तिगत स्तर पर भी 72 घंटे के भीतर कंपनी के पोर्टल पर आवेदन करना होता है।

किसानों काे एक दिन का अतिरिक्त समय देते हुए 23 मार्च तक आवेदन मांगे गए थे लेकिन सिर्फ 250 किसानों ने ही पोर्टल पर आवेदन किया है। इनमें भी कितने पात्र पाए जाते हैं यह सर्वे के बाद ही पता चल पाएगा। ऐसे में फसल बीमा योजना का लाभ दो हजार किसानों को भी मिल पाएगा इसे लेकर सवाल बन गया है। उप निदेशक कृषि विनोद कुमार का कहना है कि नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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गेहूं की फसल - फोटो : अमर उजाला

5083 हेक्टेयर में फसलों को 33 फीसदी से अधिक नुकसान

राजस्व विभाग के प्राथमिक के सर्वे के अनुसार कोरांव, मांडा एवं हंडिया में 5083.88 हेक्टेयर खेत में फसलों को 33 फीसदी या इससे अधिक नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक कोरांव में 6824 किसानों की 3129.88 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है। इसके अलावा हंडिया में एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं मांडा में दो लोग घायल हो गए हैं। मांडा में एक पशु की भी मौत हाे गई है। मांडा में चार मकान भी गिर गए हैं। हालांकि बृहस्पतिवार देर शाम तक सर्वे का काम जारी रहा। एक-दो दिनों में शासन को फाइनल रिपोर्ट भेज दी जाएगी। एडीएम प्रशासन जगदम्बा सिंह का कहना है कि किसानों को नुकसान की क्षतिपूर्ति की जाएगी।

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