मेरठ जिले में व्यापारी की हत्या करने आया एक लाख का इनामी अलीगढ़ निवासी जुबैर बुधवार सुबह एसटीएफ से हुई मुठभेड़ में मारा गया। उसने 24 दिसंबर 2025 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में शिक्षक राव दानिश हिलाल की गोली मारकर हत्या की थी। वह मुनीर गैंग का बदमाश था। उसके खिलाफ हत्या, लूट और डकैती के 43 मामले दर्ज हैं।
एएमयू शिक्षक व मुरादाबाद ठाकुरद्वारा के पूर्व विधायक के दामाद दानिश राव की हत्या से पहले जुबैर ने जेल से छूटने के बाद अलीगढ़ में अपनी सक्रियता बढ़ाई। लोगों को रंगदारी के लिए फोन किए। अक्तूबर में एक इंस्टा आईडी से हत्या के बदले का ऐलान किया था, जिसकी ओर पुलिस का ध्यान दानिश की हत्या के बाद गया।
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जेल से छूटने के बाद उसने सोशल एकाउंटों जुबैर के 728 व देवराज गैंग अलीगढ़ पर एक इंस्टा एकाउंट से 10 अक्तूबर की आखिरी पोस्ट की। जिसमें उसने दानिश हत्याकांड वाले स्थान पर ही अपने एक दर्जन साथियों के साथ खड़े होकर फोटो डालते हुए एलान किया कि अब बाहर आ गए हैं।
अब विरोधियों को देखेंगे। जो उनके साथ खड़ा होकर उन्हें भी देखेंगे। अंत में एएमयू कैंटीन का जिक्र था। बस यहीं से पुलिस का दिमाग ठनका। साथ में अपने दोस्त आतिफ की हत्या का बदला लेने की बात भी लिखी थी। मगर वह आईडी बाद में प्राइवेट हो गई।
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नौशा बरला के रहने वाले रफतउल्ला जब अलीगढ़ बसे थे तो वे अपने बच्चों को पढ़ाने के इरादे से आए थे। यहां स्कूल-कॉलेज के छात्र गुटों की लड़ाई में पहले सबसे बड़े भाई यासिर-फहद शामिल हुए। फिर तीसरा सद्दाम भी इनके साथ हो लिया। इन तीनों भाइयों की जोड़ी गोली मार के रूप में चर्चित होने लगी। पिता ने विरोध किया तो झगड़ा कर यासिर-फहद दिल्ली चले गए। वहां अपराध करने लगे।
इसी बीच चौथा भाई जुबैर भी सक्रिय हो गया। यह भाई दाऊद की तरह खुद को डॉन की तरह स्थापित करने के लिए प्रयासरत थे और मुनीर से जुड़ गए। सद्दाम व मुनीर के मारे जाने बाद जुबैर अलीगढ़ में व यासिर-फहद दिल्ली में सक्रिय रहे।
मुनीर ग्रुप से जुड़ी गैंगवार में 2017 में जुबैर पर अमीर निशा के पास हमला हुआ, जिसमें गोली एक राह चलती एएमयू छात्रा अनम के लगी। बाद में वह मर गई। इसके बाद फिर गूलर रोड पर जुबैर पर हमला हुआ। इसी गैंगवार में 23 अक्तूबर 2018 को शाहबेज नाम के अपराधी की हत्या हुई थी।
जिसमें जुबैर आदि नामजद थे। उस समय वह पकड़ा नहीं गया। इसके बाद अप्रैल 2019 में जुबैर को दिल्ली पुलिस ने उसकी पत्नी हुदा के साथ न्यू फ्रेंड्स कालोनी के एक लूट के मामले में दबोचा था। इसके बाद जुलाई 2025 में वह छूटकर आया।
खुन्नस से ज्यादा खौफ कायम करने की साजिश
पुलिस ने बेशक एएमयू शिक्षक राव दानिश हत्याकांड का खुलासा मुखबिरी के संदेह में किया। मगर जरायम पेशेवर इस दुस्साहस को मुखबिरी के शक से खौफ कायम करने को रची गई साजिश मानते रहे। इसे लेकर यह तथ्य भी पुलिस के सामने आए कि जुबैर ने जेल से छूटने के बाद शहर में कुछ लोगों को रंगदारी के लिए फोन किए। हालांकि लोग डर की वजह से पुलिस के पास नहीं गए। न इस धमकी को गंभीरता से लिया। मगर दानिश की हत्या में इनका नाम उजागर होने के बाद इन लोगों में डर देखा गया।
गाली देकर गोली मारते समय कहा था-अब पहचाना
दानिश की हत्या के बाद पुलिस को मिले सीसीटीवी से साफ हुआ था कि उन्होंने दानिश के बगल में आकर गोली मारी। जांच में यह भी सामने आया कि घटना से पहले उसने गाली देकर दानिश से कहा था कि अब पहचाना। कुछ कदम दानिश भागा, फिर उसके गिरने पर एक बदमाश ने अपना नकाब हटाया था।
तभी जुबैर का नाम आया। सात साल जेल में रहने के बाद उसका अलीगढ़ का नेटवर्क टूट गया। जेल में रहने पर लॉरेंस विश्रोई के ग्रुप सहित कई अपराधी ग्रुपों से जुड़ गया। जेल से छूटते ही उसने सोशल मीडिया पर खुद को सक्रिय किया। नए लड़कों को जोड़ा। फिर अपनी दहशत बनाने के लिए इस घटना को उसी पुराने अंदाज में अंजाम दिया, जिससे वही पुरानी दहशत वापस हो सके।
ये था मामला
चर्चित एएमयू शिक्षक की हत्या में शामिल था जुबैर, तलाश में 35 बार दिल्ली गई पुलिस
एएमयू एबीके बॉयज स्कूल के कंप्यूटर शिक्षक राव दानिश अली की 24 दिसंबर 2025 की देर शाम एएमयू परिसर में ही ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर हत्या की गई थी। इसी साल एक जनवरी को हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने जुबैर व उसके दोनों भाइयों के मददगार और मृतक राव दानिश के पड़ोसी सलमान कुर्ते वाले को जेल भेजा था। तब से पुलिस इन तीनों की तलाश में थी।
इस दौरान अलीगढ़ पुलिस ने अब तक करीब 35 बार दिल्ली पहुंचकर तीनों की खोज की। इस दौरान करीब 12 से ज्यादा साथियों से पूछताछ की। मगर हर बार यही सुराग लगता कि उनका ठिकाना दिल्ली का शाहीन बाग, जामिया व ओखला में है। इनाम घोषित होने के बाद एसटीएफ भी तलाश में जुट गई।