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जाकिर पर कार्रवाई को लेकर जुदा-जुदा जज्बात

Sun, 10 Jul 2016 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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zakir naik
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 इस्लामिक उपदेशक डा. जाकिर नाईक पर केंद्र सरकार की सख्त कार्रवाई चर्चा में आ गई है। अधिकांश लोगों ने उन्हें धर्म गुरु न मानते हुए महज एक मार्गदर्शक बताया है, जो अपने अनुसार ही लोगों को इस्लाम से संबंधित कुछ खास बातों पर राय मशविरा देता है। इन लोगों का मानना है कि पूरे मामले की गहनता से जांच होनी चाहिए। जाकिर अलीगढ़ में एएमयू के कोर्ट मेंबर रहे हैं। हालांकि मेंबर बनने के बाद वह कभी एएमयू या अलीगढ़ नहीं आए, जबकि उनका कार्यकाल तीन साल का था। वह 2013 से 11 जून 2016 तक कोर्ट के सदस्य रहे हैं। अब इस कोर्ट में 42 सदस्यों का चुनाव होने जा रहा है।
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एएमयू के जनसंपर्क विभाग के सलाहकार डा. राहत अबरार ने बताया कि सन 2001 में एएमयू के छात्रों ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था। उसमें डॉ. जाकिर नाईक आए थे। इसके बाद कभी उनका एएमयू में आना नहीं हुआ। यहां तक कि कोर्ट मेंबर रहते हुए भी वह कभी एएमयू नहीं आए। यकीनन वो हर धर्म के बारे में बेहतर जानकारी रखते हैं।
अगर कोई किसी का मुरीद है तो इसमें उस्ताद की क्या खता है..? अगर शागिर्द कहीं कुछ कर दे तो उसकी सजा उस्ताद को कैसे दी जा सकती है..? पूरे देश में कई लोग धार्मिक मामलों में तकरीरें कर रहे हैं। कट्टरता को बढ़ावा दे रहे हैं। क्या सभी पर कार्रवाई हो रही है..? अगर सभी पर कार्रवाई नहीं हो रही है तो फिर किसी एक पर क्यों..?
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- खालिद हमीद, शहर मुफ्ती
जाकिर की तकरीर सुनी है। उन्हें कुरान, गीता सहित तमाम धर्मों के धर्मग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। उन पर कोई भी कार्रवाई होने से पहले गहनता से जांच होनी चाहिए। क्योंकि किसी की बातों से प्रभावित होकर अगर कोई कुछ करता है तो ये उसका अपना फैसला है।
- मुफ्ती जाहिद, सुन्नी धर्म गुरु एएमयू
किसी भी धर्म में आतंकवाद की कोई जगह नहीं है। जाकिर नाईक के प्रकरण में जांच पर सब कुछ निर्भर करता है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकता है। अगर उन्हाेंने कुछ गलत किया है तो कार्रवाई होनी चाहिए।
- नादिर नकवी, शिया मामलों के जानकार
जाकिर नाईक ने जकात के नाम पर मिले करोड़ों रुपये का दुरुपयोग किया है। जाकिर की तकरीरों में रसूल अल्लाह की खिलाफत होने पर देवबंद ने उनके खिलाफ फतवा जारी कर दिया था। उनका अलीगढ़ में एक बार आना हुआ है इससे ज्यादा और कुछ नहीं। ऐसे लोग अलीगढ़ में न आएं यही बेहतर है।
- ख्वाजा हलीम, यूपी हज कमेटी के सदस्य
जांच का विषय तो ये है कि जाकिर नाइक जैसे लोगों का सरपरस्त कौन है.? 20 साल बाद आज अचानक उनकी तकरीरों की याद क्यों आ रही है..? अलीगढ़ में उनका कभी आना हुआ हो मुझे याद नहीं है, लेकिन ऐसे उपदेशकों की अलीगढ़ को जरूरत नहीं है।
- हाजी जमीरउल्लाह, कोल विधायक
मैंने आज तक जाकिर की तकरीर नहीं सुनी है मजहबी नेता के तौर पर किसी सदस्य ने उनका नाम प्रस्तावित किया तो वह एएमयू की सर्वोच्च संस्था एएमयू कोर्ट के मेंबर बनाए गए, लेकिन 12 जून 2013 से सदस्य बनने के बाद 12 जून 2016 तक वो कभी कोर्ट बैठक में नहीं आए। एक बार इससे पहले वो 2001 में कैनेडी हाल में कभी आए थे जहां छात्रों से उनका संवाद हुआ था।
- अहमद खुर्शीद, एएमयू कोर्ट के वरिष्ठ सदस्य
देश में कई लोग धार्मिक मामलों में खुल कर बयान दे रहे हैं, तकरीरें कर रहे हैं। मुजफ्फरनगर और आगरा सहित कई कांड में खुल कर समुदाय विशेष के लोगों ने पूरी कौम को निशाना बनाया। क्या उनके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है। अगर नहीं तो केवल जाकिर नाईक के प्रकरण में ऐसा क्यों हो रहा है।
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- आरिफुल इस्लाम, एएमयू शिक्षक
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