कॉलर को थोड़ा सा ऊपर चढ़ा के, सिगरेट के धुएं का छल्ला उड़ा के... हिंदी फिल्म के इस गाने की तर्ज पर शहर के रामघाट रोड पर बाइकर्स रंगबाजी करते फिर रहे हैं। यह कोई नई बात नहीं है। शहर में पिछले एक दशक में इसी तरह की रंगबाजी में बाइकर्स में हुई गैंगवार में आधा दर्जन हत्याएं तक हो चुकी हैं।
हालांकि पुलिस शिकंजे के चलते उस रंजिश से जुड़े ज्यादातर बाइकर्स या तो जेल में हैं, या कुछ शहर छोड़ गए। कुछ अब शांत हैं। कुछ की हत्या हो हो चुकी है। शहर में अब फिर से नए गैंग मुंह उठाने लगे हैं। उसी का परिणाम मंगलवार की रात हुई फायरिंग की घटना को माना जा रहा है। इसे लेकर शहरवासियों में जरूरत महसूस हो रही है, नए उठ रहे गैंग और उसके सदस्यों पर तगड़े शिकंजे की, ताकि इनकी करतूत से अब किसी की जान पर न बने।
रामघाट रोड पर बाइकर्स गैंगवार का इतिहास किसी से छिपा नहीं है। शहर के पढ़ने लिखने वाले युवाओं और रंगबाज युवाओं के बीच टशन से शुरू हुई झगड़े-झंझट की बिसात कब खूनी रंजिश का रूप लेती गईं, इसका किसी को अंदाजा न हुआ। हां, हत्याओं का सिलसिला शुरू होने के बाद पुलिस के सिर ठीकरा इस बात का फूटा कि बेवजह फर्राटा भरते घूम रहे युवाओं पर अगर पुलिस ने शिकंजा कसा होता तो शायद हत्याएं न होतीं।
वर्ष 2011 में विनय कटियार की विक्रम कॉलोनी में हुई हत्या के बाद यह क्रम शुरू हुआ। उस घटना का प्रतिशोध याद कर आज भी लोग सिहर उठते हैं। घटना के प्रतिशोध में कटियार समर्थकों ने सेंटर प्वाइंट से पीएसी तक जमकर उत्पात मचाया। इस घटना के बाद कपिल लाला, वीनू कालिया, शरद गोस्वामी, जीतू, धीरा ठाकुर की हत्याएं गैंगवार की सुर्खियां हैं।
साथ में रंगबाजी में एक ट्रक चालक की हत्या भी किसी से छिपी नहीं है। आज इन सभी के मुकदमे में अदालतों में हैं। इस गैंगवार से जुड़े ज्यादातर युवा अब अधेड़ उम्र में आ गए और रंगबाजी से तौबा कर काम-धंधे में जुटकर परिवार को संभालने लगे हैं।
इधर, अब शहर में नए गैंगों ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। इसी का परिणाम पिछले वर्ष एक डॉक्टर और एक युवक का अपहरण होना है। साथ में रामघाट रोड पर आए दिन छोटे-मोटे झगड़े होते रहते हैं। इसी कड़ी में मंगलवार की रात इस झगड़े ने दो युवकों की जान जोखिम में डाल दी। इस हमलावर गुट में लीडरों पर अपराध दर्ज हैं, जबकि उनके साथ कुछ नए युवा जुड़ रहे हैं जो खुद का कॉलर खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।
यह है मूल वजह
टीनएज बच्चों को प्रोटक्शन से शुरू होती है रंगबाजी
इस रंगबाजी पर गौर करें तो शहर के अधिकांश प्रमुख स्कूल रामघाट रोड पर हैं। यहां आने वाले टीनएज बच्चों को उनकी छोटी-मोटी गलत हरकतों पर प्रोटक्शन देने के लिए रंगबाज युवक आगे आते हैं। इसके एवज में वह उनसे धन वसूली भी करते हैं।
यहीं से यह बच्चे प्रोत्साहित होते हैं, फिर वह किसी से भी टकराने की जहमत उठाने लग जाते हैं। आगे चलकर वह अपराध के दलदल में फंसते चले जाते हैं। पुराने इतिहास पर गौर करें तो अधिकांश युवा कुछ ऐसी ही पृष्ठभूमि से यहां तक आए हैं।