मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किशोरावस्था से ही गो सेवा करते रहे हैं। गायों को गुड़ चना खिलाना उनकी दिनचर्या में शामिल है। हाल में ही वह अपने राजनीतिक विरोधी सपा की अर्पणा यादव की गाेशाला में गये और वहां की व्यवस्थाएं देखीं। सीएम के गो प्रेम से गाेशाला संचालकों में भी आश जगी है शायद अब हालात कुछ सुधरें। कम से कम चारा और इलाज तो मिले।
अलीगढ़ की एक दर्जन छोटी बड़ी गाेशालाओं का हाल बेहाल है। कहीं गाेशाला खंडहर हो गई हैं तो कहीं कब्जा हो गया है। जहां गायें हैं, वहां चारा नहीं है। जहां बीमारी है, वहां इलाज नहीं है। सरकारी मनमानी का आलम ये है कि गो सेवा आयोग लखनऊ में पंजीकरण कराने के बाद भी कोई मदद नहीं मिल रही है।
शुरुआत शहर से करते हैं। नगला मसानी इलाके में पंचायती गाेशाला है। जिसमें 310 गाय, 70 सांड और 35 बछड़े हैं। यहां की संचालिका कृष्णा गुप्ता कहती हैं कि गाय के दूध और कमेटी के चंदे से इसका संचालन हो रहा है। नगर निगम, जनप्रतिनिधि या सरकार से कोई राहत कभी नहीं मिली है। 80 वर्ष पुरानी इस गाेशाला की देखरेख गुजरे 10 वर्ष से सुचारु रूप से हो रही है। आगरा रोड स्थित राधारमण गाेशाला में घायल बीमार और लावारिस पशु पहुंचते हैं।
पुलिस चेकिंग में पकड़ी गई गाय, दुधारू पशु भी यहां पर भेजे जाते हैं। इसके अलावा घायल और बीमार पशु भी यहां आते हैं। इसका संचालन लोगों के निजी चंदे से हो रहा है। तहसील कोल के पीछे नगर निगम की एक छोटी गाेशाला है जहां बीमार पशु भी रहते हैं।
गभाना। गांव हीरापुर में शहीद अजय पाल सिंह के नाम से 8 साल से गाेशाला संचालित है। यहां करीब डेढ़ सौ गायों रहती हैं। पैसे के अभाव में पूरा निर्माण खंडहर हो चुका है। गायों को खाने तक के लिए भूसा व चारा तक नहीं मिल रहा है। यहां कभी कोई सरकारी मदद नहीं मिली है।
गाेशाला में गायाें के लिए मैंने पेंशन पर लोन ले रखा है। केसीसी के कर्ज से भूसा मंगाती हूं। पैसे के अभाव में गायें भुखमरी की कगार पर पहुंच चुकी हैं। -अचलेश सिंह, गोशाला संचालक
छर्रा। छर्रा-कासगंज रोड पर शांति निकेतन आश्रम स्थित श्री लक्ष्मी नारायण गाेशाला में लगभग 40 गायों का पालन पोषण चल रहा है। गाेशाला के संचालक स्वामी परमानंद महाराज ने बताया कि गाेशाला गौ सेवा आयोग लखनऊ में पंजीकृत है। आयोग ने पांच वर्ष पूर्व सहयोग राशि के रूप में 2800 रुपये दिये थे। उसके बाद एक पाई नहीं मिली। प्रतिदिन 1500 रुपये का खर्च गौ भक्तों के सहयोग से पूरा होता है। गायों से प्राप्त दूध आश्रम के भक्तों व आश्रम के प्रयोग में आता है। इसकी बिक्री नहीं होती।
जट्टारी। कस्बा के पिसावा रोड स्थित श्रीश्याम पुरुषोत्तम गाेशाला पर इन दिनों 28 लाख रुपये का मोटा कर्ज है। गाेशाला को हर महीने लगभग 13 लाख रुपये की जरूरत है, जबकि पूरा दान मिलाकर 10 लाख रुपये हो पाते हैं। इसी वजह से कर्ज बढ़ते बढ़ते 28 लाख तक पहुंच गया है। छह वर्ष पहले गौ सेवा आयोग से गाेशाला के लिए 85 हजार रुपये मिले थे। उसके बाद कुछ नहीं मिला। सपा सरकार में कोल विधायक जमीरउल्लाह के प्रयास से पौने तीन लाख रुपये की सहायता मिली।
इसके बाद गाेशाला के संस्थापक शिवदत्त शर्मा दो बार पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। अपनी ही जमीन पर सन् 2008 में पांच गायों से शुरुआत करने वाले शिवदत्त शर्मा की गाेशाला आज जिले की सबसे बड़ी गाेशाला है, जिसमें करीब 1395 गौवंश है। इसकी एक शाखा टप्पल के गांव सिमरौठी में है। यहां 22 सांड, 4 बैल, 160 बछड़े, 185 बछिया, 150 दुधारू गाय और 504 गाय हैं। यहां कार्यरत 40 कर्मचारियों के वेतन पर तकरीबन 2.5 लाख रुपये खर्च होता है, जबकि गोमाता के इलाज में 50 हजार रुपये लगते हैं। शिवदत्त शर्मा कहते हैं कि अगर सीएम वाकई में गौसेवा को बढ़ावा देना चाहते हैं तो इसके लिए कोई ठोस योजना भी बनाएं।
अतरौली। कस्बा के पूर्व चेयरमैन तुलसीप्रसाद अग्रवाल ने छर्रा मार्ग स्थित अपनी निजी जमीन में वर्ष 2008 में गोशाला बनाई। अब इसमें 95 गायें पल रही हैं। नौ मजदूर सेवा में रहते हैं। पुलिस जब भी गायों के ट्रकों को पकड़ती है। गायों को इसी गोशाला में छोड़ा जाता है। यहां का पूरा खर्च स्वयं तुलसी प्रसाद अग्रवाल उठा रहे हैं।
खैर। मंडी समिति परिसर में चारे के लिए भटकती गायों को जब पशु चोर उठाने लगे तो चिंतित मंडी कारोबारियों ने वहां गोशाला खोल दी। तीन वर्ष पूर्व ग्यारह लोगों की कमेटी गठित कर श्रीरामश्याम गोशाला शुरू कर दी गई। पक्के निर्माण की अनुमति नहीं थी इसलिए मंडी परिसर में अस्थायी टीनशेड डाल दिया गया। कमेटी के अध्यक्ष श्यामसुंदर अग्रवाल व सदस्य सीताराम बंसल ने बताया कि गोशाला में 140 गाेवंश हैं। हर महीने का खर्च डेढ़ लाख रुपये आता है। चंदा एक लाख रुपये ही हो पाता है। बाकी रकम सदस्य मिलकर जुटाते हैं। अब भी 300 के करीब गौवंश यहां पर आसरे की तलाश में घूमता रहता है। कमेटी को उम्मीद है कि योगी सरकार इस बारे में गंभीरता से सोचेगी।