कौशल कुमार ओझा
इगलास विधान सभा सीट को बचाए रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दम लगा रहे हैं। यहां के मतदाताओं का मिजाज अपने प्रतिनिधि नेता को बदलते रहने की है। 2002 से 2017 के बीच हुए चार विधान सभा चुनाव एवं एक उप चुनाव पर नजर डाले तो दो बार रालोद एवं एक-एक बार कांग्रेस, बसपा एवं भाजपा के प्रत्याशी जीते हैं। सपा का कभी खाता तक नहीं खुला।
मंदी एवं नए मोटर व्हीकल एक्ट सहित अन्य कई मुद्दों को लेकर भाजपा शासन पर लोग सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश में होने वाले उप चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीब ढाई साल के कार्यकाल की यह अग्निपरीक्षा भी है। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में भाजपा के राजवीर दिलेर करीब 75 हजार मतों से बसपा के राजेंद्र कुमार को पराजित कर इगलास विधान सभा क्षेत्र के विधायक बने थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में वह हाथरस से भाजपा सांसद निर्वाचित हुए और इगलास विधान सभा क्षेत्र के विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। उसके बाद से यह इलगास विधायक पद खाली है।
आचार संहिता लगने के पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज इगलास विधान सभा क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। मतदाताओं की डोर थामे रखने के लिए करीब 1100 करोड़ रुपये के परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी करेंगे। पिछले पांच विधान सभा एवं उप चुनाव पर नजर डाले तो भाजपा की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। यहां के मतदाताओं का मिजाज नेताओं को बदलते रहने की है। 2012 में इस क्षेत्र से रालोद के त्रिलोकीनाथ दिवाकर विधायक बने थे। उन्होंने बसपा के राजेंद्र कुमार को हराया था।
सपा के कन्हैया लाल तीसरे स्थान पर थे। 2007 में रालोद की विमलेश सिंह विधायक निर्वाचित हुई थी। उन्होंने बीएसपी के मुकुल उपाध्याय को हराया था। कांग्रेस की राकेश चौधरी पत्नी पूर्व सांसद चौ. विजेंद्र सिंह तीसरे स्थान पर थी। 2002 में कांग्रेस के चौधरी विजेंद्र सिंह विधायक बने थे। उन्होंने बीएसपी के नरेंद्र कुमार दीक्षित को पराजित किया था। भाजपा के मलखान सिंह तीसरे स्थान पर थे। 2004 में चौधरी विजेंद्र सिंह कांग्रेस सांसद निर्वाचित हुए। उसके बाद हुए उपचुनाव में बसपा के मुकुल उपाध्याय ने भाजपा के मलखान सिंह को पराजित कर विधायक पद जीता था।
विजेंद्र एक मात्र नेता जो तीन बार विधायक बने
पूर्व सांसद एवं कांग्रेसी चौधरी विजेंद्र सिंह एक मात्र नेता है, जिन्होंने इगलास विधान सभा क्षेत्र का तीन बार नेतृत्व किया है। वह कहते हैं कि वह इगलास में कभी चुनाव नहीं हारे। उनकी पत्नी राकेश सिंह जरूर हार गई थी। विजेंद्र सिंह वर्ष 1989, 1993 एवं 2002 में इगलास विधान सभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। इसके अतिरिक्त ज्ञानवती, राजेंद्र सिंह, गायत्री देवी आदि ने विधान सभा में इगलास का नेतृत्व किया है।
मोदी लहर में सभी सीटों पर जीती थी भाजपा
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की एक जनसभा ने सभी विपक्षियों के समीकरण ध्वस्त कर दिए थे। भाजपा के सभी सात विधायक बहुमत से जीते थे। इन सभी विधायकों को एक एक लाख से ऊपर वोट मिले थे। सबसे बेहतरीन जीत इगलास से राजवीर दिलेर ने दर्ज कराई थी।