ताला, तालीम और तहजीब के लिए दुनिया भर में मशहूर अलीगढ़ अपने 216 वर्ष के इतिहास में पर्यटन में कभी अपनी पहचान नहीं बना सका। इसकी दो वजह रहीं, पहला यहां कोई विश्व प्रसिद्ध पयर्टन स्थल नहीं है। दूसरा, जो धार्मिक स्थल बड़े पयर्टन स्थल बन सकते थे, उन पर हुक्मरानों ने ध्यान नहीं दिया। इन धार्मिक स्थलों में तमाम सुविधाओं का होना तो दूर की बात, शहर से उनके संपर्क मार्ग तक नहीं बन सके हैं। यही नहीं रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर उनका कोई प्रचार प्रसार तक नहीं हुआ है।
प्रशासनिक सुस्ती का आलम ये है कि विश्व प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी (वृंदावन) के विग्रह को प्रगट कराने वाले स्वामी हरिदास की तपोस्थली श्रीखेरेश्वर धाम को कभी वृंदावन से नहीं जोड़ा जा सका। हालांकि, आज तक उनके वंशज अपने संस्कार करने के लिए श्रीखेरेश्वर धाम में ही आते हैं। अब एक उम्मीद नोएडा में बनने जा रही ‘फिल्म सिटी’ से जरूर बंधी है। शायद इसके बसने के बाद अलीगढ़ के प्राचीन स्थलों पर फिल्मों और टीवी सीरियल की शूटिंग हो और इनकी पहचान देश के पटल पर हो सके।
1- वर्ष 2014 में पूर्व कबीना मंत्री स्व. ख्वाजा हलीम पर्यटन विभाग के सलाहकार बने तो उन्होंने विकास भवन में एक कक्ष में पर्यटन विभाग की अस्थायी शुरुआत कराई, लेकिन उनके निधन के साथ ही ये एक कक्ष भी खत्म हो गया।
2-वर्ष 2007 में सांसद रहते हुए चौ. बिजेंद्र सिंह ने धरणीधर ताल, भोज ताल में सौंदर्यीकरण कराया।
3-वर्ष 2017-18 में सांसद सतीश गौतम ने केंद्र सरकार की स्प्रिचुअल सर्किट-2 योजना में श्रीखेरेश्वर धाम मंदिर में एक करोड़ 8 लाख और दूसरी योजना में अचलताल में 50 लाख रुपये से घाटों का जीर्णोद्धार कराया।
अलीगढ़ मंडल में पर्यटन विभाग कोई दफ्तर नहीं है, आगरा से ही कामकाज होता है। इस वर्ष अलीगढ़ में कोई योजना या कहीं अन्य कोई निर्माण कार्य प्रस्तावित नहीं है। कासगंज के सोरों में निर्माण कार्य कराया जा रहा है। - अमित श्रीवास्तव, डिप्टी डायरेक्टर पर्यटन विभाग आगरा।