कौशल कुमार ओझा
गंगा एवं यमुना नदी के दोआब में स्थित अलीगढ़ जनपद के निवासियों की सांसें उधारी के ऑक्सीजन पर चल रही है। जनपद में वन क्षेत्र 2 प्रतिशत से भी कम है, जबकि स्वस्थ पर्यावरण के लिए कुल क्षेत्रफल का 33 प्रतिशत होना चाहिए। जनपद की सीमा से प्रवाहित काली नदी गंगा एवं अलीगढ़ ड्रेन यमुना नदी को मैली कर रही हैं।
विशेषज्ञ कहते हैं कि वातावरण में ऑक्सीजन एवं कार्बन डाईऑक्साइड का संतुलन बनाए रखने के लिए क्षेत्रफल के 33 प्रतिशत क्षेत्र में वन होना चाहिए। अच्छी फसल के लिए बारिश जरूरी है और बारिश के लिए वन क्षेत्र। अलीगढ़ कृषि प्रधान जनपद है और यहां की आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां इसी के इर्द-गिर्द घूमती हैं। जनपद के 40 लाख से अधिक नागरिकों के चेहरे पर मुस्कान लहलहाते फसलों को देखकर आती है। गांवों में अच्छी पैदावार होने पर शहर का व्यापार भी कई गुना बढ़ जाता है। शहर के आवासीय क्षेत्रों में चल रहे कल-कारखाने दमघोटू हालात उत्पन्न कर रहे हैं। अत्यधिक मात्रा में रसायन के प्रयोग एवं प्रदूषण के कारण दोआब क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी बंजर एवं बीमार होती जा रही है। विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस पर यह चिंता लोगों की जुबां पर है।
जनपद में वन क्षेत्र बहुत कम है। इससे वातावरण में ऑक्सीजन एवं कार्बन डाईऑक्साइड का संतुलन बिगड़ रहा है। सड़क के दोनों ओर व्यापक स्तर पर बड़ी पत्ती वाले पौधे लगाने की जरूरत है, जिसमें धूल बाध्यकारी क्षमता, डस्ट बाइडिंग कैपेसिटी हो। छोटी पत्ती पर धूल ज्यादा देर नहीं रुक पाती है। प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है। - डॉ. मुकेश भारद्वाज, वनस्पति विज्ञान, डीएस कॉलेज।
जनपद में वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का मात्र 1.8 प्रतिशत है। बावजूद इसके बेरहमी से पेड़ों एवं जंगलों को काटा जा रहा है। अंडला ताजा उदाहरण है। नदियां नाला बन गई हैं। वेटलैंड्स पर अवैध कॉलोनिया एवं घर बन रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन-प्रशासन गंभीर नहीं है। समय रहते ध्यान नहीं दिए तो काले हिरण भी विलुप्त हो जाएंगे। - रंजन राना, प्रबंधक, पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति।
समय रहते नहीं चेते तो भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली एवं एनसीआर की हालत हम लोग देख चुके हैं। प्रदूषण के कारण महामारी जैसे हालात भविष्य में आ सकते हैं। लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण के स्तर में बेहद सुधार देखने को मिला था। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के लिए शासन, प्रशासन के साथ-साथ जनभागीदारी बेहद जरूरी है। - रामगोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।