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जेएन मेडिकल कॉलेज में उच्च क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट का काम शुरू

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कालेज अस्पताल के लिए पीएम केयर्स फंड से एक नए ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को सौंपी गई है। इस ऑक्सीजन प्लांट की उत्पादन क्षमता एक हजार लीटर प्रति मिनट होगी।
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प्लांट का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑक्सीजन प्लांट के निर्माण के लिए उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओबैद अहमद सिद्दीकी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जबकि रजिस्ट्रार अब्दुल हमीद इस प्लांट के जल्द से जल्द पूरा होने के लिये एनएचएआई और डीआरडीओके के साथ कॉर्डिनेट कर रहे हैं। परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी, डीआरडीओ, संयंत्र के आउटलेट को अस्पताल के ऑक्सीजन नेटवर्क से जोड़ेगी। आक्सीजन जेनरेशन प्लांट के पूरा होने की तारीख से उसे एक साल की वारंटी प्राप्त होगी, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बिजली ट्रांसफार्मर, स्टैंडबाय जेनरेशन सेट (125 केवीए) और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराएगी। यह नया ऑक्सीजन प्लांट, क्रिटिकल केयर वार्ड (सीसीडब्ल्यू), कोरोनरी केयर यूनिट (सीसीयू), रेस्पिरेटरी आईसीयू, पीडियाट्रिक आईसीयू और मेडिसिन वार्ड की जरूरतों को पूरा करेगा।
एएमयू के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने पीएम केयर्स फंड से ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए आशा व्यक्त की है कि यह आक्सीजन प्लांट जेएन मेडिकल कॉलेज की ऑक्सीजन की जरूरतों को पूरा करेगा । यह सामान्य रूप से सभी रोगियों विशेष कर समाज के कमजोर वर्गों तथा एएमयू समुदाय को लाभान्वित करेगा। कुलपति ने नई टीकाकरण नीति का भी स्वागत किया, जिसके तहत केंद्र सरकार 18-45 आयु वर्ग के लोगों को टीकाकरण के लिए राज्यों को मुफ्त टीके उपलब्ध कराएगी।
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मेडिकल कॉलेज की ऑक्सीजन आपूर्ति क्षमता दोगुनी हो जाएगी
जेएन मेडिकल कॉलेज में अभी लिक्विड ऑक्सीजन को गैस में बदल कर मेडिकल ऑक्सीजन बनाने वाले दो प्लांट काम कर रहे हैं। एक प्लांट जिसको कुलपति ने एक महीने पहले स्वीकृत किया था। वह भी स्थापित होना है। एक प्लांट कार्डियोलॉजी यूनिट में है, जिसमें सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है। नए प्लांट से मेडिकल कॉलेज की ऑक्सीजन आपूर्ति की क्षमता मौजूदा क्षमता से दो गुना तक हो जाएगी।
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