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अलीगढ़ में महिलाओं का धरना खत्म, रास्ते खुले

Sun, 01 Mar 2020 06:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
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धरना खत्म - फोटो : अमर उजाला
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ऊपरकोट उपद्रव के बाद सोमवार दोपहर से अलीगढ़-अनूपशहर रोड स्थित जीवनगढ़ पुलिया पर नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में चल रहे धरने को खत्म कराने को लेकर इलाके के मुअज्जिज लोग आपस में बंटे नजर आए। कुछ धरने को खत्म करने का विरोध कर रहे थे, तो कुछ समर्थन थे। इसी बात को लेकर मुअज्जिज, दुकानदारों में दिन भर जमकर नोकझोंक होती रही। 

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मगर, किसी तरह स्थानीय लोगों व नेताओं के मनाने समझाने पर धरना हट गया।  देर शाम 9 बजे क्वार्सी बाईपास पर यातायात सुचारु होने के बाद एक तरफ जहां शासन और गृह विभाग को पूरी रिपोर्ट भेजी गई, जबकि एसएसपी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के जरिये जीवनगढ़ वालों को धन्यवाद दिया। इसे तरह-तरह से ट्रोल किया जाता रहा। कुल मिलाकर सोमवार दोपहर 3 बजे से चल रहे धरने के चलते शनिवार शाम कुल 125 घंटे बाद यातायात सुचारु हो सका।

सोमवार दोपहर तीन बजे से बीच सड़क पर जाम लगाकर धरने पर बैठी महिलाओं को पहले ही दिन से बाहरी करार देकर स्थानीय लोग बचने की कोशिश कर रहे थे। मगर उनके समर्थन में काफी संख्या में युवाओं की भीड़ इधर-उधर खड़ी रहती थी। साथ ही महिलाओं को धूप आदि से बचने के लिए सड़क पर तंबू भी लगवा दिए गए थे। 
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इस तरह धरना लगातार चल रहा था। इस मार्ग पर यातायात बाधित होने के कारण पुलिस ने क्वार्सी चौराहे से और उधर महेशपुर फाटक से वाहनों की आवाजाही बंद कर रखी थी। वैसे तो पहले दिन से धरना खत्म कराने के हर संभव प्रयास किए जा रहे थे। शुक्रवार को भी दिन भर बहुत तेज कवायद थी। मगर, शनिवार सुबह से जैसे पुलिस प्रशासनिक इंतजाम वहां देखे जा रहे थे, उसे देखकर ही लोग अनुमान लगा रहे थे कि आज धरना हटवाया जाएगा। 

इसी बीच सुबह से ही धरना खत्म करने की कवायद शुरू हो चुकी थी। इलाके के दुकानदार व मुअज्जिज लगातार इस कोशिश में थे कि कैसे धरने को खत्म किया जाए। इस बाबत कई बार इन लोगों की बैठकें हुईं। दोपहर करीब एक बजे इन लोगों की बैठक हुई, जिसमें धरने को खत्म करने व जारी रखने की बात पर जमकर तू-तू, मैं-मैं तक हुई। 

दरअसल, इन लोगों का कहना था कि धरने पर महिलाएं बैठीं हैं, उन्हें पुलिस का मुखबिर व दलाल मान रही हैं, जो गलत है। साथ ही कुछ लोग इस धरने को जारी रखना चाहते थे। इसी बीच दोपहर ढाई बजे दुकानदारों व मुअज्जिज लोगों ने बैरीकेडिंग हटा दी। इसके बाद महिलाएं बिफर गईं और दोबारा बैरीकेडिंग लगाने लगीं, जिसे पुलिस ने लगने नहीं दिया। 

इस बात पर पुलिस व महिलाओं में जमकर नोकझोंक हुई। महिलाएं आगे बढ़ने लगीं, जिन्हें महिला पुलिस ने वापस कर दिया। काफी देर तक तनातनी का माहौल रहा। पुलिस ने धरनास्थल पर पुलिस ने वाहन खड़ा कर फोर्स तैनात कर दिया। 
 

सलमान ने मनाया तो अज्जू ने समझाया

पुलिस प्रशासनिक मशीनरी जीवनगढ़ के धरने को हटाने की दिशा में ऐसा कोई प्रयास नहीं था, जिसे न कर रही हो। समझाने से लेकर डराने, धमकाने, कार्रवाई करने, मुकदमे दर्ज करने तक का क्रम जारी था। जब किसी भी स्तर पर बात बनती नहीं दिख रही थी तो इलाके के मुअज्जिज लोगों को पुलिस ने धरने के विरोध में तैयार किया और उन्हें महिलाओं के बीच धरना खत्म कराने के लिए लगाया। वह सफल होते नहीं दिखे तो इलाके में प्रभाव रखने वाले पूर्व विधायक जमीरउल्लाह से लेकर विवेक बंसल तक को लगाया गया। शुक्रवार को वह भी धरना हटवाने में असफल रहे। अंदर से यही बात आती रही कि एएमयू के छात्र-छात्राएं इन्हें भड़का रहे हैं और नेतृत्व कर रहीं महिलाएं उनके इलाके की नहीं हैं। 

इसके बाद शुक्रवार शाम से ही पुलिस प्रशासन ने इलाके के दुकानदारों व स्थानीय लोगों को धरने के विरोध के लिए आगे कर लिया। दुकानदार कह रहे थे कि उनके काम धंधे का नुकसान हो रहा है। जैसे ही यह मत सामने आया तो इन्हीं को धरना हटवाने के लिए आगे किया गया। इसी कड़ी में शनिवार सुबह से ही सपा महानगर अध्यक्ष अज्जू इशहाक व सपा युवजन सभा के प्रदेश सचिव सलमान शाहिद को इस धरने को हटवाने के लिए लगाया गया। इस कड़ी में सुबह से ही सलमान शाहिद जीवनगढ़ की गलियों में घूमकर लोगों को धरना हटवाने के लिए तैयार करने लगे।

इसके बाद दोपहर में सलमान के साथ अज्जू भी धरना स्थल पर पहुंच गए। अज्जू ने तो माइक संभाल लिया और सलमान महिलाओं को समझाने में लगए गए। दोनों अपने अपने तरीके से उन्हें समझाने व मनाने में लग गए। जब डीएम-एसएसपी को मौके पर बुलाने की बात हुई तो उन्होंने अधिकारियों से वार्ता की और उन्हें बुला लिया। डीएम व एसएसपी ज्ञापन लेने के बाद चले गए। इसके बाद भी कुछ महिलाएं हटने को तैयार नहीं थीं। फिर सलमान उन्हें मनाने में लगे रहे और शाम को रास्ता साफ होने के बाद ही यह नेता वहां से हटे। इसके बाद गलियों में जमा भीड़ को घरों में भेजने के लिए भी यह दोनों घंटों तक प्रयासरत रहे।
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दोनों ओर से टकराव की थी तैयारी, मगर सब अमन से निपटा

जिस दिन से यह धरना लगा था, उसी दिन से धरनास्थल के आसपास भारी मात्रा में ईंटों के ढेर, पत्थरों का अंबार, लाठी-डंडे, छतों पर कांच की बोतलें यह गवाही दे रही थीं कि अगर पुलिस से टकराव हुआ तो क्या होगा। जब जब इस धरने को हटाने के प्रयास हुए, तब तब पुलिस स्तर से भी मजबूत तैयारी थी। शनिवार को सुबह से ही धरनास्थल के आसपास के अलावा सर्किट हाउस में भारी संख्या में पुलिस, पीएसी व आरएएफ मौजूद थी। अंदेशा यही था कि अगर टकराव हुआ तो पुलिस सख्ती से निपटेगी। मगर शुक्र है कि यहां सब कुछ अमन से निपट गया।

पुलिस के पास पहुंची दुकानदारों की तहरीरें 
इस धरनास्थल के इर्द-गिर्द के कई दुकानदारों ने पुलिस को तहरीरें दी हैं। जिनमें एक लकड़ी विक्रेता की ओर से और एक सीसीटीवी तोड़ने को लेकर दी गई है। हालांकि पुलिस स्तर से इनमें अभी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही, बल्कि जांच में रखा गया है।

बाहरी बताकर बचते रहे धरने के समर्थक
धरने का समर्थन कर रहे जीवनगढ़ के लोग दिन भर इन महिलाओं को बाहरी बताकर हटाने की कोशिश से बचते रहे। वह पुलिस को बार-बार एक ही दलील दे रहे थे कि यह महिलाएं बाहर की हैं। हम लोगों को न पहचान रही हैं और न बात मान रही हैं। इसके चलते हटाने में मुश्किल हो रही है।

अब जीवनगढ़ की हर गली के मुहाने पर फोर्स तैनात
धरना हटाने के बाद जीवनगढ़ की हर गली के मुहाने पर पुलिस व आरएएफ तैनात कर दी गई है। लोगों को बेवजह से गली में टहलने या गली से बाहर आने पर टोका टाकी की जा रही है। क्वारसी व महेशपुर से यातायात खोल दिया गया है। इसके बाद रात 9 बजे से यातायात सुचारु हो गया है।

धरना समाप्त होना समझदारी का काम: परवेज
अलीगढ़। जीवनगढ़ की पुलिया पर रोड जाम कर चल रहे धरने को समाप्त करने पर महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष परवेज अहमद ने इस समझदारी भरा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि धरना समाप्त कर हमारे समाज की महिलाओं ने सूझबूझ का परिचय देते हुए शहर की अमन चैन के लिए सराहनीय कार्य किया है। मैं उन सभी महिलाओं पुरुषों का शुक्रिया अदा करता हूं । हमें अपनी बात आजकल राजनीतिक हालातों को देखते हुए रखनी है। एक कानून के विरोध में देश के 60-70 प्रतिशत लोग आपके साथ हैं परंतु हमें यह आंदोलन एक जगह अहिंसावादी तरीके से चलाना चाहिए। जगह- जगह रोड जाम करने से हमें कुछ नहीं हासिल होगा।
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