कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की छात्राओं को अब डीएम व अन्य जिलास्तरीय अधिकारियों की पत्नियां नियमित रूप से देखभाल करते हुए मां का प्यार देंगी। यह निर्णय शनिवार को आकांक्षा समिति की बैठक में लिया गया है।
गौरतलब हो कि देवरिया कांड के बाद प्रदेश में आवासीय बालिका विद्यालयों, नारी संरक्षण गृहों आदि पर शासन-प्रशासन की नजर है। अब ऐसे में अधिकारियों की पत्नियों द्वारा लिया गया यह निर्णय बालिकाओं को पठन-पाठन, खानपान, सुरक्षा आदि में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। अब यह बालिकाएं इन आवासीय विद्यालयों के सहारे अपना भविष्य संवार सकेंगी।
बता दें कि डीएम चंद्र भूषण सिंह की पत्नी डॉ. अंजना सिंह सेंगर के नेतृत्व में शनिवार को आकांक्षा समिति की बैठक जिलाधिकारी कैंप कार्यालय में आयोजित हुई थी। यहां एसएसपी की पत्नी रिचा साहनी, एडीएम सिटी की पत्नी डॉ. संगीता सिंह, बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय तथा सभी 13 कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की वार्डन व शिक्षिकाएं उपस्थिति रहीं।
अंजना सिंह सेंगर ने सबसे पहले विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य, पढ़ाई आदि के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह स्वयं तथा अन्य अधिकारियों की पत्नियां जिले के सभी 13 कस्तूरबा आवासीय विद्यालय को गोद ले रही हैं।
इसी के साथ कहा कि पढ़ने वाली सभी छात्राएं अब उनकी बेटियां हैं। इस कारण इन सभी बालिकाओं की नियमित देखभाल वह स्वयं करेंगी। इस संबंध में अंजना सिंह सेंगर ने बताया कि वह तथा अन्य अधिकारियों की पत्नियां एक मां के रूप में सभी छात्राओं की नियमित देखभाल कर समय-समय पर विद्यालयों में जाकर उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा व पढ़ाई पर ध्यान रखेंगी।
आकांक्षा समिति की समस्त पदाधिकारी नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करेंगी। वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं को और भी अधिक सुधारने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही हर एक पदाधिकारी द्वारा वह हर संभव प्रयास किया जाएगा, जिससे कस्तूरबा गांधी के छात्रावासों में रहने वाली छात्राओं को कभी मां की कमी महसूस ना हो।