पिछले पांच वर्षों में जिले में कुल 1,30, 689 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए। इनमें 1,14, 331 पुरुषों के नाम हैं, जबकि सिर्फ 16,358 महिलाओं ने ही लाइसेंस बनवाया। यानी कुल डीएल में महिलाओं की हिस्सेदारी 12.5 प्रतिशत है।
अलीगढ़ शहर की सड़कों पर स्कूटी और कार चलाती महिलाओं की संख्या भले तेजी से बढ़ी हो और वह खूब फर्राटा भरती दिखाई दें, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने के मामले में उनकी भागीदारी अब भी बेहद कम है।
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कई बार पुलिस की वाहन चेकिंग के दौरान महिलाएं बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाते हुए पकड़ी भी जाती हैं। हिदायत के बाद भी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में वे खास रूचि नहीं दिखा रही हैं। सबसे खास बात है कि जिले में जितनी गाडि़यां महिलाओं के नाम पंजीकृत हैं, उसके सापेक्ष ड्राइविंग लाइसेंस महिलाओं के नाम नहीं हैं।
डीएल में महिलाओं की हिस्सेदारी कम
पिछले पांच वर्षों में जिले में कुल 1,30, 689 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए। इनमें 1,14, 331 पुरुषों के नाम हैं, जबकि सिर्फ 16,358 महिलाओं ने ही लाइसेंस बनवाया। यानी कुल डीएल में महिलाओं की हिस्सेदारी 12.5 प्रतिशत है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार हर साल करीब 30 प्रतिशत वाहन महिलाओं के नाम पंजीकृत होते हैं। इसके बावजूद लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही है। आरटीओ कार्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार इस साल जनवरी से 15 अप्रैल तक 14,467 पुरुषों ने डीएल बनवाने के लिए आवेदन किया है, जबकि महिलाओं ने सिर्फ 926 आवेदन किए हैं। थर्ड जेंडर श्रेणी में 03 आवेदन आए हैं।