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Aligarh News: भोर की पहली किरण के साथ ही खबरों का गुलदस्ता लेकर पहुंच जाती 'अम्मा'

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72 साल की उम्र में जब शरीर थकने लगता है, लेकिन क्रांति देवी के मजबूत इरादे उम्र पर भारी है। पिछले 12 साल से वह बरला में अखबार बांट रही हैं। भोर की पहली किरण के साथ उनका यह सफर शुरू होता है और बरला ही नहीं पास के गांव सराय में भी वह पैदल घर-घर जाकर अखबार बांटती हैं।
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वह बताती हैं कि पहले उनके पति रामवीर शर्मा के पास एजेंसी थी। 2014 में उनका बीमारी के चलते निधन हो गया। करीब 17 साल पहले बड़े बेटे राजेश शर्मा का हादसे में निधन हो गया था। दो बेटों, बहू और दो नातियों की जिम्मेदारी, परिवार की कमाई का कोई साधन नहीं। बताते हुए उनकी आंखें नम हो जाती हैं।

क्रांति देवी ने बताया कि पड़ोसी ने सलाह दी कि अम्मा गुजर बसर के लिए कुछ तो करना होगा, आप अखबार बांटने का काम करती रहना। अमर उजाला ने भी उनका साथ दिया। सुबह साढ़े तीन-चार बजे वह उठती और स्नान के बाद पूजा करती हैं। तब तक अखबार आ जाता है। इसके बाद वह पैदल ही घर-घर जाकर अखबार बांटती हैं।
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करीब एक डेढ़ किलोमीटर दूर सराय गांव में वह अखबार बांटने जाती हैं। पैदल जाते देख, अक्सर दूध लेकर जाने वाले दूधिया उन्हें अपनी साइकिल पर सराय तक के लिए बैठा लेते हैं। 12 साल के उनका यह अनवरत सफर जारी है। अब दो बेटे भी अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं। क्रांति देवी कहती है कि अब तो आदत बन गई। पूरे कस्बे के लोग उन्हें अम्मा कहते हैं और उनका सम्मान करते हैं।
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