एएमयू अलीगेरियन बिरादरी ने एएमयू एकेडमिक काउंसिल के उस फैसले का स्वागत किया है जिसमें तय किया गया है कि एएमयू में काम करने वाले लोगों के बच्चों को इंटरनल स्टूडेेंट्स की तरह नहीं विचार किया जाएगा, अगर वह किसी दूसरे शिक्षण संस्थान की पृष्ठभूमि से हैं।
पहले ईसी की बैठक में यह प्रस्ताव लाया गया था कि एएमयू में काम करने वाले लोगों के बच्चे अगर किसी दूसरे शिक्षण संस्थान में पढ़ भी रहे हैं तो भी उन्हें विश्वविद्लय का इंटरनल विद्यार्थी माना जाए। इसके विरोध में कई पूर्व छात्रों के संगठनों ने अपनी आवाज बुलंद की थी। एएमयू के पूर्व छात्र मकसूर अहमद उस्मानी ने इस फैसले के लिए कुलपति जमीरउद्दीन शाह का पत्र लिखकर (ईमेल) आभार व्यक्त किया है।
इसके अलावा एएमयू के फहीम अख्तर ने कहा है कि 23 जनवरी 2016 को यह फैसला लिया गया था। जिसके बाद से ही इसको लेकर सवाल उठने लगे थे। 30 जनवरी को एएमयू के छात्र और शुभचिंतकों की एक बैठक आयोजित हुई थी इसमें इस बात पर चिंता जाहिर की गई थी कि यूनिवर्सिटी एक नाजुक दौर से गुजर रही है। ऐसा कदम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे की बहाली की दिशा में समस्याएं पैदा कर सकता है।
डॉ. मंजूर अहमद ने कहा कि विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक दर्जा बहाल होना पहली प्राथमिकता है। इमरान और मो. शिकोह ने कहा कि जल्द ही एक कमेटी गठित की जाएगी, जो कि सभी पार्टियों के सांसदों और नेताओं से मिलेगी। यह विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक स्वरूप के मुद्दे पर जनमत का निर्माण करेगी। साथ ही जागरूकता भी पैदा करेगी।