कभी गाड़ियों की नंबर प्लेट पर नंबर डालने का काम करने वाले 65 वर्षीय जमाल अहमद की जिंदगी के नंबर इन दिनों खराब चल रहे हैं। सात साल से उनकी पत्नी पार्किंसन की बीमारी से चलने फिरने से लाचार है। उसके इलाज के लिए जमाल अहमद को आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले गोल्ड कार्ड का इंतजार है। जमाल का दावा है कि एक आशा वर्कर ने उनसे सारी औपचारिकताएं पूरी करा ली थीं। उनका पात्रता सूची में भी नाम है, लेकिन कार्ड अभी तक जारी नहीं हुआ है। जबकि पत्नी की तबियत दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।
फिरदौस नगर गली नंबर 3 के रहने वाले जमाल अहमद के दिन का एक बड़ा हिस्सा हाथों में पत्नी के इलाज के कागज लिए सीएमओ कार्यालय और मलखान सिंह जिला अस्पताल के चक्कर काटते हुए बीतता है। जमाल कहते हैं कि सात साल से उनकी पत्नी चारपाई पर है। वही उसकी देखभाल करते हैं।
इसलिए काम भी छोड़ना पड़ा। रामघाट रोड स्थित एक नर्सिंग होम में डॉक्टर का इलाज चल रहा है। उनके दो बेटी और एक बेटा है। एक बेटी दिव्यांग है। परिवार की स्थिति बेहद कमजोर है। पत्नी के इलाज का अब एक ही सहारा है कि किसी तरह आयुष्मान भारत योजना का गोल्ड कार्ड मिल जाए, जिससे पत्नी का इलाज हो सके। जमाल कहते हैं कि पिछले वर्ष बताया गया कि उनका नाम कार्ड की पात्रता सूची में आ गया है।
उसके बाद औपचारिकताएं भी पूरी कर दीं। अब जिला अस्पताल जाते हैं तो वहां से सीएमओ आफिस जाने के लिए कह दिया जाता है। सीएमओ आफिस में जिला अस्पताल जाने के लिए कह दिया जाता है। पिछले कई महीनों से यही सिलसिला चल रहा है। अब तो हिम्मत भी जवाब दे गई है।
- तीन सितंबर से 30 सितंबर तक गोल्ड कार्ड के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। जमाल अहमद का घर मौलाना आजाद नगर अर्बन हेल्थ सेंटर के दायरे में पड़ता है। वहां पर भी कैंप प्रस्तावित है। इनको अर्बन हेल्थ सेंटर प्रभारी से मिलने का परामर्श दिया गया है। जिससे इनको वहां पर लगने वाले कैंप की तारीख की जानकारी मिल सके। उसी कैंप में इनको कार्ड जारी करने की औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी।
- डॉ. खान चंद, एसीएमओ, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत योजना