मिशन शक्ति अभियान के तहत महिला व बालिका अपराध के मुकदमों के निस्तारण में पुलिस स्तर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में न्यायालय ने किशोरी से छेड़खानी के एक मुकदमे में आरोपियों को एक साल जिला प्रोवेशन अधिकारी की निगरानी में रहने की सजा सुनाई है। यह मुकदमा जिला पुलिस व अभियोजन पक्ष ने मिशन शक्ति के तहत जल्द निस्तारित कराए जाने की सूची में शामिल किया था। इस अभियान के तहत यह पहला मुकदमा निस्तारित हुआ है।
एसीजेएम-6 के न्यायाधीश मौहम्मद तौसीफ रजा के न्यायालय से यह सजा सुनाई गई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 1 जुलाई 2014 की है, जब लोधा क्षेत्र की 16 वर्षीय किशोरी घर में अकेली थी, तभी नामजद जगदीश, ओमवीर, टीटा व बहादुर दोपहर तीन बजे उसके घर में घुस आए और उसके साथ अनर्गल बातें करते हुए छेड़खानी की। विरोध करने पर वहां रखा सामान तोड़ दिया। किसी तरह उसने खुद को कमरे में बंद कर बचाया। इस मामले में धारा छेड़खानी की 354ए, 452, 504, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में बाद में पीड़ित पक्ष ने तहरीर के विपरीत अदालत में साक्ष्य पेश किए।
न्यायालय ने पुलिस साक्ष्य व अभियोजन पैरवी के चलते चारों को दोषी करार देते हुए किसी तरह के दंडादेश के बजाय जिला प्रोवेशन अधिकारी के अधीन एक वर्ष की निगरानी में छोड़ने के आदेश दिए हैं। यह चारों प्रोवेशन अधिकारी के समक्ष 20-20 हजार के जमानतनामे दाखिल करेंगे और अंडर टेकिंग देंगे कि वे सदाचार बनाए रखेंगे। अगर कोई गलती हुई तो बुलाए जाने पर न्यायालय में हाजिर होंगे। वहीं पीड़ित पक्ष के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दायर करने के निर्देश दिए हैं।
- यह अदालत का अपने तरह का अनूठा फैसला है। जिला पुलिस ने जो मुकदमे मिशन शक्ति के तहत जल्द निस्तारण के लिए सूचीबद्ध किए हैं। उसमें शामिल पहले मुकदमे में न्यायालय ने पीड़ित पक्ष के पक्षद्रोही होने के कारण पुलिस साक्ष्य व अभियोजन पैरवी पर यह फैसला सुनाया है। आरोपी छेड़खानी के दोषी करार दिए हैं, मगर वे दंडादेश के बजाय वे एक साल प्रोवेशन अधिकारी की निगरानी में रहने का आदेश देकर छोड़े गए हैं। -डॉ.अरविंद, एसपी क्राइम-पुलिस नोडल मिशन शक्ति