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कचहरी में किसने बरसाईं होशियार पर गोलियां

Thu, 26 May 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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 कचहरी में 29 मई 2013 की वह दोपहर शायद ही कोई भुला पाएगा। जब टप्पल के गांव बाजौता की रंजिश में बसपा नेता मुकेश की हत्या में निरुद्ध जेल से पेशी पर आए होशियार सिंह की ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी गई।
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इस हत्या के बाद भड़के वकीलों ने सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए पुलिस तक को दौड़ा दिया था। मगर पुलिस के कमजोर साक्ष्य संकलन और होशियार परिवार के गवाही से मुकरने पर यह सनसनीखेज हत्याकांड अपने नतीजे पर न पहुंच सका। साक्ष्यों व गवाही के अभाव में अदालत ने हत्या के सभी आरोपियों को बुधवार को बरी कर दिया। हालांकि गवाही से मुकरने पर होशियार परिवार के चार लोगों पर वाद दायर किया है। मगर बड़ा सवाल है कि फिर किसने यह हत्या की।
गांव बाजौता में नवंबर 2012 में बसपा नेता व नोएडा में रीयल एस्टेट कारोबार से जुड़े मुकेश की रात को स्कार्पियो से गांव लौटते समय हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में होशियार और परिवार के कई लोग जेल में निरुद्ध थे। इसी हत्या के मुकदमे में जेल से पेशी पर आए होशियार की दीवानी में मुख्य चौराहे पर दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की गई थी।
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जब हत्या हुई तो दो सिपाही व एक अन्य बंदी बाल-बाल बच गए और लोगों ने देखा था कि किस तरह बैग में असलहों का जखीरा लेकर आए हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। इसके बाद भी पुलिस साक्ष्य संकलन में कमजोर रही।
रही सही कसर होशियार पक्ष से मुकदमे की वादी होशियार की पत्नी कैलाशी व परिवार के मुकेश, योगेंद्र, नगेंद्र गवाही से मुकरने पर पूरी कर दी। इसके चलते एडीजे-13 दिनेश कुमार मिश्रा के न्यायालय से बुधवार को हत्याकांड के सातों आरोपी सत्यपाल, क्षेत्रपाल, मनवीर, पवन, प्रवीन, धर्मेंद्र निवासीगण बाजौता टप्पल, अविनाश निवासी बसौली गोंडा को बरी कर दिया गया। साथ ही चारों गवाहों पर धारा 344 के तहत वाद दायर किया गया है। इस मामले में आरोपी पक्ष से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता बुद्धपाल सिंह ने की।
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हत्या के वक्त राजस्थान पुलिस हिरासत में थे दो नामजद
अधिवक्ता बुद्धपाल सिंह के अनुसार हत्या में दो नामजद मुकेश का साला अविनाश व भाई क्षेत्रपाल को लेकर यह तथ्य पेश किया गया था कि वह घटना के समय राजस्थान पुलिस की हिरासत में थे। हालांकि इस तथ्य को लेकर कई उतार चढ़ाव भी आए थे।
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