कहा जाता है कि किसी भी दौर की असली तस्वीर उसके नौजवानों के फैसलों में दिखती है। अलीगढ़ के इस दौर में भी कुछ ऐसा ही बदलाव दर्ज हो रहा है।
जहां कभी नौकरी को ही इज्जत और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता था, वहां अब युवा खेतों की ओर लौट रहे हैं। हरी सब्जियों की खेती ने उन्हें एक ऐसा रास्ता दिखाया है, जो आमदनी के साथ आत्मनिर्भरता और अपने परिवार के साथ रहने का संतुलन दे रहा है। इन युवाओं की मेहनत का नतीजा है कि पिछले दो वर्षों में हरी सब्जियों का रकबा 1123 हेक्टेयर बढ़ा है। इससे पैदावार भी बढ़कर 2 लाख 72 हजार टन के पार पहुंच गई है।
ग्राउंड जीरो: यहां सबसे ज्यादा उग रही सब्जियां
खैर, टप्पल, लोधा, धनीपुर और इगलास अब जिले के सब्जी बेल्ट बन गए हैं। छर्रा क्षेत्र में इस साल 10 हजार टन गाजर अकेले पैदा होना इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है। खरीफ, रबी और जायद में बोई जाने वाली हरी सब्जियों का रकबा बढ़ता जा रहा है। रबी के सीजन में सबसे अधिक लगभग चार हजार हेक्टेयर में सब्जियां उगाईं जा रही हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार सब्जियां उगाने वाले केवल 500 किसान ही उनके संपर्क में है, जबकि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा बताई जा रही है। इसका मतलब है कि खेती का यह उभार सरकारी कागजों से भी आगे निकल चुका है।
नौकरी छूटी, खेती ने संभाला
केस 1: गिरीश कुमार (जलाली)
. दिल्ली में इनकम टैक्स विभाग की नौकरी विवाद में फंसी तो खेत लौटे। अब खीरा, बंदगोभी और मक्का से बेहतर कमाई। साथ में एमएससी भी कर रहे हैं।
केस 2: राजेश कुमार (लक्ष्मणगढ़ी)
. एमए-बीएड के बाद दिल्ली के कनॉट प्लेस की नौकरी छोड़ दी। अब 40 बीघा में खेती कर रहे हैं। वे कहते हैं कि सेलरी से ज्यादा इनकम और परिवार का साथ जरूरी है।
केस 3: सुनील शर्मा (खैर)
. नोएडा की नौकरी छोड़ 50 बीघा में खेती कर रहे हैं। इनका मानना है कि हर ग्रेजुएट को नौकरी नहीं मिलेगी, लेकिन खेती में हर युवा को मौका जरूर मिल सकता है।
केस 4: मानवेंद्र राघव (अतरौली)
. कैमोमाइल से ग्रीन टी, तेल और इत्र बनाते हुए अब ये एग्रीकल्चर को स्टार्टअप मॉडल में बदलने की तैयारी में हैं।
केस 5: इंजीनियर हिमांशु मित्तल
. इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के बाद नौकरी छोड़ वापस गांव लौटने पर इन्होंने अमरूद, जामुन, लीची, चीकू के साथ प्रयोगात्मक खेती शुरू कर दी।
. हरी सब्जियों से रोजाना आमदनी संभव है। पढ़े-लिखे युवाओं का आना बड़ा बदलाव है। ड्रिप और स्प्रिंकलर पर 90% तक सब्सिडी और मुफ्त बीज योजना भी चल रही है। - सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी
ट्रेंड साफ: खेती बना कमाई का मॉडल
साल कुल रकबा कुल पैदावर
2023-24 8250 हेक्टेयर 2.05 लाख टन
2024-25 8375 हेक्टेयर 2.27 लाख टन
2025-26 9373 हेक्टेयर 2.72 लाख टन
(सिर्फ दो साल में 10% से ज्यादा ग्रोथ, सबसे तेज उछाल रबी सीजन में)