अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
सपा संरक्षक स्व. मुलायम सिंह यादव का वैसे तो अलीगढ़ शहर और जिले से बहुत बड़ा भावनात्मक व सियासी नाता रहा। उनके राजनीतिक बड़े भाई कहे जाने वाले उस जमाने के कद्दावर नेता स्व. राजेंद्र सिंह जिले की इगलास सीट से विधायकी जीतते थे, मगर एक नाता ऐसा भी है, जिसे लोग याद कर आज भी सिहर उठते हैं।
वर्ष 1996 के चुनाव अभियान के दौरान शहर के कंपनी बाग मैदान की चुनावी सभा में देरी से आने के कारण वे हेलीकॉप्टर से ही कूद पड़े थे और बैरीकेडिंग फांद कर सीधे मंच पर पहुंच संबोधन शुरू कर दिया था। उन्होंने अपनी झोली फैलाकर कहा कि आप लोग प्यार बहुत करते हैं, मगर इस प्यार के बदले वोट क्यों नहीं देते? इस पर लोगों ने वादा किया और भाजपा के तीन बार के विधायक केके नवमान को हराकर उनकी पार्टी प्रत्याशी अब्दुल खालिक को विधायक बनाया। इसके बाद जब मुलायम सिंह अलीगढ़ आए तो सिविल लाइंस से लेकर ऊपरकोट तक जो ऐतिहासिक स्वागत हुआ, उसे आज भी सियासी लोग याद करते हैं।
सपा शासन काल में मिली नगर निगम व मीनाक्षी पुल को स्वीकृति
1996 में नगर निगम का पहला चुनाव उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के दौरान हुआ और भाजपा के पहले मेयर के रूप में आशुतोष वार्ष्णेय निर्वाचित हुए। मगर यह भी उपलब्धि मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल 1993 से 1995 के मध्य की है, जब नगर पालिका अलीगढ़ की आबादी 5 लाख से अधिक होने पर इसे नगर निगम का दर्जा मिला। इसी दौरान रामघाट रोड के खूनी फाटक के रूप में विख्यात मीनाक्षी पुल पर ओवरब्रिज की मंजूरी मिली। इन दोनों उपलब्धियों के सहारे मुलायम सिंह यादव ने कंपनी बाग के मैदान से अपने व अब्दुल खालिक के लिए वोट मांगे थे।
इस तरह हुआ था हेलीकॉप्टर से कूदने का घटनाक्रम
विधानसभा चुनाव के लिए कंपनी बाग में सभा थी। सभा की अनुमति शाम 5 बजे तक की थी। मुलायम सिंह यादव को आते आते देर हो गई। हेलीकॉप्टर धनीपुर हवाईपट्टी पर उतरना था। वहां से कार से कंपनी बाग आना था। पार्टी के सभी नेता धनीपुर पर इंतजार कर रहे थे। भीड़ कंपनी बाग में मौजूद थी।
समय भी 5 बजने को होने वाला था। इस पर मुलायम सिंह यादव हेलीकॉप्टर से कंपनी बाग के ऊपर आए और करीब 10 फुट ऊंचाई से हेलीकॉप्टर से कूद गए। बस फिर क्या था। यह देख उनके समर्थक व पार्टी के नेता दंग रह गए। 10 से 15 मिनट में अपनी बात रखकर सभा समाप्त कर दी।
इसके बाद वे गाड़ी से धनीपुर पहुंचे। जहां से हेलीकॉप्टर से रवाना हो गए। इस किस्से को याद कर पार्टी के नेता आज भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। यही बात शहर के लोगों के जेहन में घर कर गई। जब नवमान को हराकर खालिक विधायक बने तो मुलायम सिंह शहर के लोगों का आभार व्यक्त करने आए। इसके बाद जो स्वागत हुआ ऐसा स्वागत कभी नहीं हुआ।