राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय। संवाद
वाह रे नियम! बीएससी के बाद छात्र एमए नहीं कर सकता, लेकिन उसी छात्र को बीए में दोबारा दाखिला लेने की इजाजत है। राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के इसी अजीब नियम ने एक छात्र के सामने ऐसी स्थिति खड़ी कर दी कि उसे स्नातक के बाद परास्नातक की बजाय फिर से स्नातक में प्रवेश लेना पड़ा।
डीएस कॉलेज की काउंसिलिंग में सामने आए इस मामले ने न सिर्फ शिक्षकों को हैरान कर दिया, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि आखिर ऐसे नियमों का खामियाजा छात्रों को कब तक भुगतना पड़ेगा। काउंसिलिंग के दौरान छात्र तौफिक ने जब बीएससी के बाद राजनीतिक विज्ञान (पॉलिटिकल साइंस) से एमए में प्रवेश की बात कही तो शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय का नियम इसकी अनुमति नहीं देता। अगर, उसे एमए करना है तो बीए करना होगा।
शिक्षकों ने छात्र को नियमों का हवाला देकर समझाने का प्रयास किया कि बीएससी के बाद एमए में प्रवेश संभव नहीं है। वह एमएससी कर ले, लेकिन तौफिक ने एमए ही करने की कहते हुए फिर से स्नातक में ही प्रवेश ले लिया। इसके अलावा तीन अन्य विद्यार्थियों संतोष, मुस्कान व राहुल ने भी बीएससी के बाद एमए करने की इच्छा जताई, लेकिन नियमों की वजह से उन्हें भी निराश होकर लौटना पड़ा।
छात्रों ने कहा कि वह आगे की पढ़ाई कला संकाय में करना चाहते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय के नियमों के चलते उन्हें एमए करने की अनुमति नहीं मिली है। यह शिक्षा के साथ अन्याय है। काउंसिलिंग के दौरान सामने आए इस घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की प्रवेश नीति को लेकर विद्यार्थियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
- बीएससी करने वाला छात्र एमए नहीं कर सकता है। इसको लेकर एक समिति बनाई जाएगी। इस पर समिति निर्णय लेगी। - प्रबुद्ध सिंह, कुलसचिव, आरएमपीयू
- बीएससी के बाद एमए में दाखिला लेना चाहिए। यूजीसी का नियम भी यहीं कहता है। अगर विश्वविद्यालय ऐसा नहीं कर रहा तो यह छात्रों के साथ अन्याय है। - डॉ. रक्षपाल सिंह, डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि आगरा शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष