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खैर में नक्सलियों के स्लीपर सेल पहुंचा रहे हथियार

Mon, 17 Oct 2016 01:30 AM IST
अभिषेक शर्मा
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खैर में नक्सलियों के स्लीपर सेल पहुंचा रहे हथियार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोएडा में नक्सलियों संग दबोचे गए चंडौस के दो युवकों ने खुलासा किया कि जिले की खैर तहसील में नक्सलियों के स्लीपर सेल सक्रिय हैं। वह उनको यहां से हथियारों की सप्लाई पहुंचा रहे हैं।
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इसके लिए मददगार दो साल से नोएडा में रहकर नौकरी कर रहा चंडौस के टेंट हाउस संचालक का बेटा आशीष सारस्वत ही बना। वह नोएडा में नक्सलियों के संपर्क में आया और उसने रुपयों के लालच में यहां हथियारों की तस्करी के धंधे से जुड़े लोगों से माल मंगाना शुरू कर दिया।
ब्रजकिशोर उर्फ ललुआ तीन दिन पहले ही यहां से छोटे हथियारों व कारतूसों की खेप लेकर गया था। अभी बड़े हथियार हथियारों की खेप पहुंचनी बाकी थी कि इस पूरे नेटवर्क पर एटीएस का शिकंजा कस गया। एटीएस की इस कार्रवाई में मूल रूप से चंडौस के गांव इमलोरा निवासी देवेंद्र सारस्वत का बेटा आशीष व चंडौस के ही गांव थानपुर निवासी मनाेहर सिंह का बेटा ब्रजमोहन उर्फ ललुआ दबोचा गया है। देवेंद्र करीब डेढ़ दशक से कस्बा चंडौस में रह रहे हैं और टेंट हाउस चला रहे हैं।
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चार बेटों में सबसे बड़ा आशीष जट्टारी के एक कॉलेज से बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र है, जबकि पिछले करीब दो साल से नोएडा में किसी रियल स्टेट कंपनी में बतौर एकाउंटेंट काम कर रहा था। जबकि ललुआ खैर के एक कॉलेज से बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है और दोनों में क्षेत्र में क्रिकेट खेलने के दौरान दोस्ती हो गई थी।
एटीएस सूत्रों की मानें तो आशीष इन दिनों जिस रियल स्टेट कंपनी में काम कर रहा है। वह दबोचे गए नक्सली मुखिया बिहार के पवन की ही कंपनी है। पूछताछ में स्वीकारा है कि उसने पवन की बातों में आकर खैर से हथियारों की सप्लाई का धंधा शुरू कर दिया।
यहां से अब तक वह कई बार एमपी मेड 32 व 9 एमएम बोर पिस्टल, देशी तमंचे आदि हथियार व कारतूसों की खेप पहुंचा चुका है। भविष्य में उसने कुछ बड़े हथियारों की खेप पहुंचाने का सौदा किया था। तीन दिन पहले ब्रजमोहन भी  हथियार  लेकर ही गया था। अब एटीएस ने खैर के उन सौदागरों की तलाश के लिए खैर में जाल फैलाना शुरू कर दिया है, जिनकी मदद से हथियार आशीष के माध्यम से नक्सलियों तक पहुंच रहे थे।
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