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पढ़ानी थी उर्दू, परीक्षा दिलाई संस्कृत की

Fri, 22 Apr 2016 01:52 AM IST
नाशिर हुसैन
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जिले के 346 स्कूलों में अल्पसंख्यक बच्चे पढ़ते हैं। सभी स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इन स्कूलों के बच्चों को पढ़ाने के लिए उर्दू की हजारों किताबें भी मंगाई गईं , लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए विभाग को उर्दू का एक अदद टीचर तक नहीं मिला। जबकि बाकी स्कूलाें में उर्दू टीचरों की संख्या चार सौ से अधिक है। नतीजा, जिन बच्चों को उर्दू पढ़नी या पढ़ानी चाहिए थी, उन्हें संस्कृत की परीक्षा दिलाई गई।
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उर्दू जबान को बचाए रखने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों कई तरह की योजनाएं चला रही हैं। मदरसों को हाईटेक बनाया जा रहा है। दूसरी तरफ अलीगढ़ के स्कूलों में उर्दू की दशा कुछ ठीक नहीं। इसमें बेसिक शिक्षा विभाग घिर गया है। नियमानुसर, जिस स्कूल में दस या दस से अधिक अल्पसंख्यक बच्चे होंगे, वहां एक उर्दू टीचर की नियुक्ति अनिवार्य है। ताकि उन्हेें उर्दू भाषा पढ़ाई-सिखाई जा सके। लेकिन हकीकत कुछ और  है। विभाग के आंकड़ों पर निगाह डालें तो ग्रामीण क्षेत्र के 346 स्कूल में दस या दस से अधिक अल्पसंख्यक बच्चे पढ़ते हैं। 15 स्कूल तो ऐसे हैं जहां 100 से लेकर 490 तक बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन इन स्कूलों में उर्दू टीचर नियुक्ति नहीं हैं। ऐसे में बच्चों को उर्दू की जगह संस्कृत पढ़ाई जा रही है। इसी भाषा में परीक्षा भी दिलाई जा रही है। 346 स्कूल में अल्पसंख्यक बच्चों की कुल संख्या 27627 है। जिसमें 11434 ऐसे बच्चे हैं जिन्हें संस्कृत की परीक्षा दिलाई गई।
कहां गईं उर्दू किताबें
बताते हैं कि जिले में करीब 34 से 37 हजार उर्दू की किताबें आईं थीं। किताबें समय से मंगाई गईं थी। बच्चों तक किताबें पहुंचाने के लिए उन्हें खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में भी भेजा गया था। अब सवाल पूछा जा रहा है कि अगर किताबें बच्चों को दी गईं तो उन्हें परीक्षा संस्कृत की क्यों दिलाई गई।
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यह उर्दू पढ़ने वाले बच्चों के संग खिलवाड़ है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन में इसकी शिकायत करने के साथ धरना-प्रदर्शन कर  विरोध किया जाएगा।
-मोहम्मद अहमद, जिलाध्यक्ष उर्दू शिक्षक संघ
इस तरह का कोई मामला अभी जानकारी में नहीं है। ऐसा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उर्दू शिक्षकों को ऐसे विद्यालय में भेजे जाएंगे जहां उर्दू शिक्षक  नहीं हैं।
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-संजय शुक्ल, बीएसए
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