समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक वीरेश यादव की चौथे मुकदमे में भी शुक्रवार एमपी/एमएलए मामलों की विशेष अदालत एडीजे-4 मनीषा के यहां से जमानत मंजूर हो गई। अब उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। संकेत हैं कि जमानती सत्यापन आदि की प्रक्रिया के बाद सोमवार के बाद कभी भी रिहाई हो सकती है। बता दें कि वीरेश यादव 4 मई को आत्मसमर्पण के बाद से जेल में निरुद्ध हैं।
एडीजीसी कुलदीप सिंह तोमर के अनुसार, दीनापुर पालीमुकीमपुर निवासी वीरेश यादव पर दर्ज मुकदमों में से प्राणघातक हमले की धाराओं के दो मुकदमे वर्ष 1997 व 1998 के दादों थाने के हैं। इनकी सुनवाई एमपी/एमएलए मामलों की अदालत एडीजे-4 मनीषा के यहां चल रही है। 26 अप्रैल को अदालत ने कुर्की आदेश जारी किए थे। 7 मई को गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश थे। इन्हीं मुकदमों में 4 मई को पूर्व विधायक ने न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। तभी से वह जेल में हैं। इनमें से एक मुकदमे में अदालत ने 9 मई को जमानत मंजूर कर ली थी। इसके अलावा निचली अदालत में भी दो मुकदमों में जमानत मंजूर कराई गई। एक मुकदमा वर्ष 1998 का था, जिसमें जमानत अर्जी पर शुक्रवार की तारीख नियत थी। वीरेश यादव के अधिवक्ता चंद्रशेखर दीक्षित, बार अध्यक्ष जगदीश सारस्वत, पूर्व डीजीसी अबसार किदवई ने नियत तारीख पर जमानत के लिए बहस की, जिसके आधार पर न्यायालय ने जमानत मंजूर कर ली है। दोनों पक्षों के अधिवक्ता ने इसकी पुष्टि की है। अब जमानती सत्यापन आदि की प्रक्रिया होगी। इसके बाद मंगलवार तक रिहाई की उम्मीद है।