जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. बादशाह खान ने कहा कि एएमयू वाले नॉन एकेडमिक आदमी को वीसी बनाते ही क्यों है। रविवार को डॉ. बादशाह एक निजी कार्य के सिलसिले में अलीगढ़ आए थे। इस दौरान वह अमुटा के धरना स्थल पर पहुंचकर एएमयू शिक्षकों को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
उन्होंने एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल द्वारा यूजीसी अधिनियम 2010 के बदले एमएयू एक्ट के अनुसार वीसी पैनल बनाने के निर्णय पर आश्चर्य व्यक्त किया और पूछा कि क्या यह संभव है। उन्होंने कहा कि यूजीसी अधिनियम 2010 को बाईपास नहीं किया जा सकता है। यदि हम अपनी मर्जी से पैनल बनाएंगे तो सरकार रोक देगी। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पूर्व जामिया शिक्षकों ने हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन भेजकर सरकार से नॉन एकेडमिक के बदले एकेडमिक को कुलपति बनाने की मांग की थी। जब से एकेडमिक कुलपति आए है, इंशाअल्लाह सब कुछ ठीक चल रहा है।
हमलोग भी पहले आईएएस एवं आर्मी के वीसी से बहुत परेशान रहे है। उन्हें पता ही नहीं होता है कि शोध एवं एकेडमिक क्या होता है। हमारे वीसी ने डायरेक्टर एकेडमिक एवं डायरेक्टर रिसर्च नियुक्त कर दिया है और संबंधित फाइल वहीं देखते है। उन्होंने कहा कि अमुटा की लड़ाई में जामिया के शिक्षक हर कदम पर सहयोग देेंगे। उन्होंने अमुटा नेताओं से कहा कि वे लोग एक दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना लगाए। जामिया के शिक्षक उसमें शामिल होंगे। अमुटा अध्यक्ष प्रो. मुजाहिद किदवई एवं सचिव सैयद मुस्तफा जैदी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि इंतजामिया के खिलाफ अमुटा नेता 29 मार्च से अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे है।